झीरमघाटी रिपोर्ट पर सरकार के बयानबाजी पर भड़की राज्यपाल,कहा मैं कोई पोस्टमेन नही हूँ ,चीफ जस्टिस से पूंछे रिपोर्ट मुझे क्यों दी।

बिलासपुर दौरे पर आई राज्यपाल अनुसूइया उइके ने झीरमघाटी की रिपोर्ट को लेकर कड़ा बयान दिया है।सरकार और मंत्रियो के लगातार बयानबाजी पर राज्यपाल अनुसुइया उइके ने सख़्त लाहजेमे कहा कि राज्यपाल कोई पोस्टमेन नही है ,जिन्होंने रिपोर्ट दी वे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस है अभी आंध्रप्रदेश में है सरकार को उनसे पूछना चाहिए कि रिपोर्ट मुझे क्योडी मुझे तो पता भी नही था उन्होंने दिया मैंने ले लिया और रिपोर्ट तो हजारों पन्ने की है उसे कैसे पढ़ा जा सकता है और रिपोर्ट तो खुले में दी गई मैन अपने लीगल ओपीनियन के बाद जो निर्देश देने थे उसके तहत रिपोर्ट सरकार को भेज दी है ।बेबाकी से अपनी बात रखने वाली राज्यपाल ने प्रदेश की आदिवासी हितों के लिए बड़ा कदम उठाने की बात कही उन्होंने कहा कि ये प्रदेश आदिवासी बाहुल्य है और मैं राजभवन में रहने के लिए गवर्नर नही बनी मैंने आदिवासियो के लिए प्रधानमंत्री से बात की जोभी खदान या प्लांट लगते उनमें उनको आजीवन रॉयल्टी मिलना चाहिए ,प्रधानमंत्री जल्द इस पर फैसला लेने वाले है। क्योंकि जिनकी जमीन है वो मजदूरी करते रह जाते है सीधा साधा स्वाभिमानी आदिवासी कुछ रुपये लेकर अपना जीवन नही चला सकता उनको जीवन भर रायल्टी ज़मीन के बदलें मिलनी चाहिए तभी उनका जीवन अच्छे से चल पाएगा ।उनको उनका हक मिलेगा तो वो भटकेंगे नही उनको अच्छी शिक्षा,स्वास्थ्य, के साथ मूलभूत सुविधा मिलेगी तो वो भी अच्छे से जी पाएंगे ,मैंने नारायण पुर के हजारों आदिवासियों को उनका हक दिल सालों से गवर्नरों ने भी इस गंभीर बात पर ध्यान नही दिया।नारायण पुर के आदिवासियों को कांकेर 150 किलोमीटर जाना पड़ता था ,संविधान ने राज्यपाल को जो शक्ति दी है मैन उसका उपयोग किया और उनकी तकलीफ दूर की।मैं हर वर्ग समाज और कर्मचारियों से मिलती हूँ ।मैं सासंद ,रही मंन्त्री और आयोग की अध्यक्ष रही मैंने इस दौरान देखा कि लोगो को कैसे राहत देनी है ।

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