स्पिकमैके द्वारा छत्तीसगढ़ में सत्रीय नृत्य की सप्ताहव्यापी सांस्कृतिक यात्रा।

भारतीय शास्त्रीय कला एवं संस्कृति से रूबरू होंगे हजारों विद्यार्थी

Bilaspur ,  जुलाई 2026। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और युवा पीढ़ी तक उसके प्रसार के उद्देश्य से स्पिकमैके (SPIC MACAY) द्वारा 13 से 20 जुलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में सत्रीय नृत्य पर आधारित Lecture-cum-Demonstration श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। इस सांस्कृतिक यात्रा के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की प्राचीन कला परंपराओं से सीधे जुड़ने तथा कलाकारों के साथ संवाद करने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति सत्रीय नृत्य की होगी, जिसे भारत के आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्यों में स्थान प्राप्त है। असम की वैष्णव सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा यह नृत्य अपनी आध्यात्मिक अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट नृत्य-व्याकरण तथा भावप्रधान प्रस्तुति के लिए विश्वभर में प्रतिष्ठित है।

बिलासपुर मैं अरपा वैली इंटरनेशनल स्कूल मैं 16 July ko 1 pm

18 July Ratanpur

19july. १२ बजे आधारशिला विद्या मंदिर

मैं सम्पन्न होगा

इस सांस्कृतिक अभियान का नेतृत्व देश की सुप्रसिद्ध सत्रीय नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर सुश्री उषा रानी बैश्य कर रही हैं। वे संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान युवा पुरस्कार (2016) से सम्मानित हैं, दूरदर्शन की ‘A’ ग्रेड कलाकार, आईसीसीआर (ICCR) की एम्पैनल्ड कलाकार, कीर्तन कला केंद्र, गुवाहाटी की संस्थापक एवं प्राचार्या, यूजीसी विजिटिंग फेलो, सीसीआरटी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की वरिष्ठ शोध फेलो तथा प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कला विभाग की संकाय सदस्य हैं। उन्हें सत्रीय नृत्य के शिक्षण, प्रशिक्षण, शोध एवं मंचीय प्रस्तुतियों का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

  • उनके साथ प्रतिष्ठित संगतकार कृष्णकांत दास (खोल),  उपेन बोरगायन (गायन) तथा डॉ. जादव बोरा (ताल) अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को समृद्ध करेंगे। डॉ. जादव बोरा

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