बेहद पीड़ा दयक खबर,उल्टी दस्त से मर गया आदिवासी युवक लक्ष्मण राम, कागज में स्वास्थ विभाग मजबूत, स्वास्थ्य मंत्री को तो इस्तीफा दे देना चाहिए, नहीं संभल रहा विभाग।
बेहद पीड़ा दयक खबर,उल्टी दस्त से मर गया आदिवासी युवक लक्ष्मण राम, कागज में स्वास्थ विभाग मजबूत, स्वास्थ्य मंत्री को तो इस्तीफा दे देना चाहिए, नहीं संभल रहा विभाग।
बिलासपुर, सीतापुर के ग्रिलहुल्डीह के एक आदिवासी युवक की उल्टी दस्त का इलाज सीएससी में नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई, स्वास्थ विभाग कागज में बहुत अच्छा चल रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई की उल्टी दस्त से आदिवासी मर रहा है, ऐसी कमरे में मंत्री से लेकर अधिकारी तक पसीना बहा कर स्वास्थ विभाग में काम कर रहे है , स्वास्थ मंत्री को तो इस्तीफा दे देना चाहिए, आपके प्रदेश में अगर एक आदिवासी उल्टी दस्त से मर रहा है तो स्वास्थ्य मंत्री को खुद को आंकलन करना चाहिए, ऐसी कमरे और गाडी से निकल कर जमीनी सच्चाई देखना चाहिए, न खुद मॉनिटरिंग कर रहे न उनके अधिकारी कर रहे है ऐसे व्यवस्था सुधरेगी कैसे, कागज में स्वास्थ विभाग नहीं सुधरेगा। अरबों खरबो का का बजट और उल्टी दस्त से आदिवासी युवक की मौत पीड़ादायक है, झकझोरने वाली खबर है, कैसे स्वास्थ मंत्री चैन से सो सकते है।35सालारके युवक की मौत से मामला शांत नहीं हुआ शव लेजाने के लियर बेचारे आदिवासी माता पिता को उधर लेना पादर बीएमओ शव वाहन नहीं दिला पाए, खाली बात करते टाइम पास कर दिया। ऐसे अधिकारी को तुरत सस्पेंड करना चाहिए, स्वास्थ विभाग इलाज नहीं कर पा रहा है तो संवेदनशीलता भी नहीं दिखा पा रहा है संवेदनहीनता की ये पराकाष्ठा है।की मौत के बाद भी मूल निवासी को मदद नहीं मिली । कौन लडेगे ऐसे गरीब आदिवासियों के लिए? आदिवासी युवक लक्ष्मण राम, ३५साल की असमय मौत हो गई, दुख बेला में जाला झाड़ू न्यूज़ डॉट काम परिवार उनके साथ और अपनी संवेदना प्रकट करता है,स्वास्थ मंत्री भले संवेदनहीन हो लेकिन हम आदिवासी परिवार के साथ पूरी आत्मीयता से संबल रखते है। संवेदनशील मुख्यमंत्री साय आए दिन कहते है सरकार की योजना और सुविधा का लाभ लोगो मिले लेकिन उनकी भावना उनके निर्देश को अधिकारी और स्वास्थ मंत्री समझ नहीं पा रहे है । मॉनिटरिंग नहीं होगी तो कंही भी व्यवस्था नहीं सुधरेगी, आदिवासी छात्रावास की तरह बिना बोरिंग के बिल निकलते रहेगा। एक दैनिक अखबार में छपी इस खबर ने बहुत कुछ कहा है लेकिन समझ का फेर है प्रशासन इसे किस तरह से समझता है।