*पूर्व महापौर बोले– राजनीतिक छवि खराब करने की साजिश, झूठे आरोप लगाने वालों पर करूंगा मानहानि का दावा*
बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की व्यापार विहार स्थित बेशकीमती जमीन के कथित आवंटन मामले में लगाए गए रिश्वत और अनियमितता के आरोपों को पूर्व महापौर रामशरण यादव ने पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से झूठी शिकायत की गई है और वे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगे।
रामशरण यादव ने कहा कि नगर निगम में किसी भी जमीन के आवंटन का निर्णय अकेले महापौर नहीं करता। सबसे पहले नगर निगम आयुक्त टेंडर जारी करते हैं, जिसके बाद मामला महापौर परिषद (एमआईसी) और फिर सामान्य सभा के समक्ष रखा जाता है। सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही किसी निर्णय पर अमल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस जमीन को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसका आवंटन कभी पूरा ही नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि जिस टेंडर की बात की जा रही है, वह टेंडर 4 तारीख को मंगाया गया था, नियम के अनुसार टेंडर 20वें दिन खोला जाना है, इस हिसाब से टेंडर 24 तारीख को ओपन किया गया, लेकिन दिन की गिनती 5 तारीख से की गई, जिसके चलते टेंडर एक दिन पहले खुल गया। समय से टेंडर खुलने पर तत्कालीन कलेक्टर ने पूरी प्रक्रिया निरस्त कर दी थी। निगम आयुक्त ने संबंधित ठेकेदारों को अमानत राशि वापस करने पत्र जारी कर दिया था। यही वजह है कि संबंधित जमीन आज भी नगर निगम के नाम पर दर्ज है। जब जमीन का हस्तांतरण ही नहीं हुआ, तब किसी प्रकार की रिश्वत लेने या किसी को लाभ पहुंचाने का आरोप तथ्यहीन है।
पूर्व महापौर ने शिकायतकर्ता पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति शहर के कई लोगों के खिलाफ लगातार शिकायतें करता है और ब्लैकमेलिंग के जरिए वसूली का प्रयास करता है। यह शिकायत भी उसी क्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।
उन्होंने दावा किया कि इस मामले की जांच वर्ष 2023 में पहले ही हो चुकी है। ऐसे में पुराने मामले को दोबारा उठाकर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने सम्मान की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे और झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।