बिलासपुर, जब सरकार थी तो छत्तीसगढ़ के सह प्रभारी विजय जांगिड़ तमतमाए रहते थे कार्यकर्ता और पदाधिकारियों केसाथ बुजुर्गों से भी गर्मी से बात करते थे , कुछ लोग मानते थे चाय से ज्यादा केतली गरम है भाई,बेहद गर्मी थी सरकार रहते विजय जांगिड़ शांति के साथ कार्यकर्ताओं से बात नहीं किए अगर कर लिए होते तो सरकार नहीं जाती , समन्वय बना लिए होते तो सरकार रहती , लेकिन सरकार की गर्मी इतनी चढ़ी कि शांति से बात ही नहीं करते थे लेकिन अब विजय जांगिड़ पहले जैसे नहीं है ,न अब उनके भड़काने वाले अब कुछ कह रहे है,न अब जांगिड़ पर भड़काने वाले हावी है न जांगिड़ अभी सुन रहे है लेकिन चुनाव आते आते और सरकार बनते ही फिर वही रूप सामने आ जाता है। आज कल सह प्रभारी जांगिड़ नरम कैसे हो गए इसका भी कांग्रेसी पता लगा रहे है, कुछ कांग्रेसी कह रहे थे गलत संगत छूट गई है , खैर जो भी हो सह प्रभारी का बदला रूप पार्टी के लिए कार्यकर्ता अच्छा मान रहे है।
