बिलासपुर -के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में लोग देर रात तक ठिठुरते हुए कवि सम्मेलन का मजा लेते रहे ,कुछ दगाबाजों ने जेब काटी तो कुछ ने वक्त,कविता के साथ वक्त कब गुजर गया पता ही नही चला,नेता अधिकारी भी कवि सम्मेलन के हुए कायल।
अयोध्या से आये हिमांशु ने कविता के माध्यम से काला ,कालाधन ,बुलेट ट्रेन और आडवाणी को याद दिला दिया, इतने निर्मोही कैसे सजन, हो गए,किसकी बातों में मग्न हो गए लौट कर फिरना आये जैसे कालाधन हो गए,चैन मिलता नही दिन रैन, तुम हो उलझे कंहा लेन में देन में मेरे जीवन की उखड़ी पटरियां आग लगे तुम्हारी बुलेट ट्रेन में,
जो रूत चले जाएगी फिर से आती नही,यह जवानी रहेगी जवानी नही,सब्र की एक सीमा होती है प्रिया हर किसी का दिल आडवाणी नही।
एक और पंक्ति में हिमांशु ने कविता के परिश्रम को उकेरा, पांव बेच कर सफर खरीदा, सफर बेचकर राँहे, नींद बेचकर कफ़न खरीदा सपने बेचकर तबाही, कागज बेचकर कलम खरीद ,कलम बेचकर स्याही, जीवन के रंगा रंग रंगों के बाजार में व्यपार,
कुछ गीतों में हम खोए कुछ गीतों संग दुनिया, अब मुश्कान बेच रहा मैं आंसू के बाजार में। प्रेम रस के साथ चार पंक्ति में नारी शक्तिका बखान करते हुए हिमांशु ने कविता पढ़ी की जिसकी कुछ लाइने ,कामदेव की उपासना का परिणाम हो कि रति हो कि कोई अवतार लेके आई हो, मेरे दिल का अभेद्य दुर्गा जितने का कोई शस्त्र हो या पूरा शास्रागार लेकर आई हो।
कवि सपना ने भी रात में सपना दिखाया, कहा जमी पर चांद पर चांद मेरे सामने उतर आया,उसे निहार मेरे दिल मे प्यार आया,खुदा से तेरे सिवा कुछ नही मांगा जिधर भी देखु तू ही तू नजर आया।एटिट्यूड रखने वाले लोगो पर सपना ने एक कटाक्ष किया भले पा जाओ तुम मन्जी कभी संतुष्ट मत होना ,जमीं तो नाप ली तुमने अभी आकाश बाकी है।
कवि संपत सरल ने मल्टीनेशनल कंपनियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि स्कूलों से मुंशी प्रेम चंद की हामिद वाली कहानी इसलिए हटा दी गई कि अगर हामिद मेले में चिमटा खररीदेग तो मल्टीनेशनल कंपनियों के ऑनलाईन शॉपिंग कौन करेगा।
संपत सरल की वर्तमान राजनीति पर कुछ लाइनों ने तालियां बटोर ली ,शुरुवात करते हुए कहा एक दिन सबकी कुर्सी जाएगी भले ही कोई कितना भी तेज फेक ले,
आज कल दो प्रकार की बात चल रही है ,एक काम की बात और दूसरी मन की बात,यदि आप मेरी बात से सहमत नही है आपकी अलग बात। जंगल मे जब आग लगती है तो हवा को जोर देन वाले बरगद बचते है न बांस के वो पेड़ जो रगड़कर चिंगारी पैदा करते है,जालिम सिंह ने डाकू जीवन से वीआरएस लेकर पॉलिटिक्स जॉइन कर लिया ,डाकू को समझ आया चुनाव जीतने के लिये डाका डालने की जरूरत नही क्यो चुनाव जीतने बाद वही घर आ जाते है, संसद के आतंकियों से भी सुरक्षा बलों ने यही कहा होगा कितने बड़े आतंकी क्यो न हो बिना चुनाव जीते अंदर नहीं जाने देंगे। एक डाकू ने बड़ी मेहनत से आसपास के मंदिरों को लूटा और खुद और खुद एक भव्य मंदिर का निर्माण करा दिया
विनोद चौबे चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में विद्यायक धर्मजीत सिंह ,महापौर रामशरण यादव, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रमोद नायक, सभापति शेख नजरुदीन, अभय नारायण राय, विजय केशरवानी, मनीष अग्रवाल, दुर्गा सोनी,सहित जिले के नेता अधिकारी मौजूद थे समीर अहमद और अकबर खान, सुधांशु मिश्रा ने व्यवस्था में मोर्चा संभाला था ।

