बिलासपुर, दवाओं की एमआरपी और रिटेल प्राइज में भारी अंतर पर सु्प्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकारा लगाई है जस्टिस विक्रम और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि 15 रुपए में रिटेल में मिलने वाली दवा की एमआरपी ढाई सौ हैइस लुट का क्या जवाब है सरकार के आंखों के सामने ये हो रहा है। बहस के दौरान कोर्ट ने पूछा दवा कंपनी की मदद क्यों कर रहे इसे पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंसर दवा में मार्जिन तीस परसेंट क्यिर्ग गया है इससे मरीजों के ढाई हजार बचेंगे, कोर्ट ने पूछ्यसभी दवा कंपनी का मार्जिन 16परसेंट क्यों नहीं करते सरकार देश में दवा तंत्र को नियंत्रित नहीर करना चाहतीर, क्या कंपनियों को मनमानी करने दिया जाए 11हजार का कैंसर इंजेक्शन अस्पताल ने 1,30में दिया एन पी पी ए लगभग निष्क्रिय है एमआरपी और रिटेल कीमत 300से 400 ये उससे ज्यादा का अंतर क्यों है ,पैसा कंहा जाता है।
मरीजों को कारोबार्ट्स मत तौले, सुप्रीम कोर्ट
ए एस जे भाटी बाजार पप्रतिस्पर्धी हैसंतुलित नीति और ग्रोथ भी देखनी होगी
कोर्ट मरीजों के पास मोल भाव की ताकत नहीं हर दवा को जेनरिक माना जाना चाहिए, केन्सर दवाओं पर सीमा लगाने पर देरी क्यों, हमने सवाल पूछे तब सरकार जागी मरीजो की जिंदगी को कारोबार से मत तौले।