बिलासपुर। जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व अध्यक्ष जिला शहर कांग्रेस कमेटी श्री प्रमोद नायक ने बिलासपुर कांग्रेस भवन में भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों, महापौर पूजा विधानी एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्रियों द्वारा कथित रूप से घुसकर तोड़फोड़ किए जाने की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
श्री नायक ने कहा कि महिला सम्मान जैसे संवेदनशील विषय की आड़ में किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा और तोड़फोड़ को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दल कथित वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन गंभीर सवालों की निष्पक्ष जांच हो तथा लोकतांत्रिक जनादेश की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस नेता ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठा रही है। प्रमोद नायक ने आरोप लगाया कि भाजपा इन सवालों का जवाब देने के बजाय संबंधित मुद्दों को उठाने वालों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
श्री नायक ने कहा कि वोट चोरी के आरोपों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष के इन सवालों से भाजपा असहज है और इसी राजनीतिक माहौल में बिलासपुर कांग्रेस भवन में इस तरह की घटना होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला मोर्चा के कुछ पदाधिकारी राजनीतिक असहमति का जवाब लोकतांत्रिक संवाद से देने के बजाय इस तरह के कृत्यों के माध्यम से देना चाहते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि महापौर पूजा विधानी, भाजपा नेत्री हर्षिता पांडे , स्नेहलता शर्मा सहित घटना में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए और साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रमोद नायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेसजन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे और भाजपा के विधायकों एवं मंत्रियों के निवास पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन संविधान, कानून और जनता के मताधिकार का सम्मान सर्वोपरि होता है। राजनीतिक शक्ति के बल पर विपक्ष की आवाज दबाने की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।