सतनामी समाज ने बचा ली गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी की सरकारी जमीन, किया विरोध, कुलपति चक्रवाल ने अग्रवाल समाज को दी थी मुफ्त में पांच एकड़ जमीन, विरोध के बाद यूनिवर्सिटी ने फैसला बदला।
सतनामी समाज ने बचा ली गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी की सरकारी जमीन, किया विरोध, कुलपति चक्रवाल ने अग्रवाल समाज को दी थी मुफ्त में पांच एकड़ जमीन, विरोध के बाद यूनिवर्सिटी ने फैसला बदला।
सतनामी समाज के धर्म गुरु बालदास साहेब ने बैठक ली और विश्वविद्यालय ने अपना निर्णय वापस लिया
सतनामी समाज के आनबान शान राजागुरु धर्मगुरु गुरु गद्दीनसीन भण्डारपुरी धाम एवं गिरौदपुरी धाम, अध्यक्ष गिरौदपुरीधाम मेला विकास समिति, राष्ट्रीय अध्यक्ष–सतनाम धर्म महासभा, अखिल भारतीय सतनाम सेना भारत वर्ष, पूज्य गुरु, गुरु बालदास साहेब जी का बिलासपुर में सामाजिक चिंतक वैज्ञानिक अधिकारी कर्मचारी प्रोफ़ेसर राजमहंत आदि वरिष्ठ जनों के साथ एक आवश्यक बैठक लेते ही गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर में विद्यापरिषद की स्थाई समिति की आनन फानन में बैठक बुलाकर पूर्व में पारित निर्णय अपास्त किया कर दिया गया I
विदित हो कि गुरू घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ के विद्या परिषद की स्थायी समिति की दिनांक 02-08-26 को 247 वीं बैठक में विषय क्र. 07.में उल्लेख है कि विश्वविद्यालय परिसर में महाराजा अग्रसेन की स्मृति में अग्रसेन वाटिका एवं प्रेरणा स्मारक निर्माण हेतु भूमि आबंटन के प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया था I उक्त प्रस्ताव से छत्तीसगढ़ वासी बहुत आक्रोशित थे I यह तथ्य धर्म गुरु बालदास साहेब ने प्रमुखता से संज्ञान में लेकर एक आवश्यक बैठक ली जिसमें यह निर्णय लिया गया कि परम पुज्य बाबा गुरु घासीदास के सिद्धांतों के अनुरूप जनहित एवं विद्यार्थियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय की भूमि को कोई भी प्रकार के आवंटन अथवा हस्तांतरण की प्रक्रिया वापस लिया जायI और न ही भविष्य में ऐसी कोई अवैध भूमि आवंटन किया जावे I
यदि यह भूमि आवंटन सम्बन्धी निर्णय वापस नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ के सर्व समाज इसके विरोध में आवश्यक संज्ञान लेगा , जिसके लिये गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मान. कुलपति जिम्मेदार होंगे I इसके लिये एक डेलीगेट के माध्यम से मान. कुलपति से मिलेंगे और वस्तुस्थिति की जानकारी लेंगे | डेलीगेट में डॉ बसंत अंचल, श्री कमल डहरिया, डॉ एस एल निराला, दिनेश लहरे, जितेंद्र पाटले, डॉ मोहन शेंडे, डॉ पीएल आदिले, सुरेश दिवाकर, एच आर मनहर, दशेराम खांडे, जीपी भास्कर I
उक्त निर्णय के तारतम्य में डेलीगेट कुलपति से मिले और सार्थक चर्चा भी हुई इस बीच कुलपति ने भूमि आवंटन का उस निर्णय को अपास्त कर दिए जाने की जानकारी के साथ निरस्तीकरण प्रस्ताव की कॉपी उपलब्ध कराई I बैठक में धर्म गुरु बालदास साहेब एवं उपस्थित बुद्धिजीवियों ने यह कहा कि गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति अपने इस कृत्य के लिये छत्तीसगढ़ के ढाई करोड़ जनता से माफ़ी मांगे जिनके आराध्य, गुरु घासीदास जी के नाम से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है I
परिणाम स्वरुप विश्वविद्यालय ने आनन फानन में दिनांक 10-08-26 को 248 वी बैठक में अपने निर्णय वापस लेते हुए यह निर्णय पारित किया कि विद्यापरिषद की स्थाई समिति की 247 वी बैठक में पारित निर्णय जिसमे अग्रवाल समाज को उद्यान विकसित करने एवं महाराज अग्रसेन वाटिका निर्माण हेतु आवंटन के प्रस्ताव को निरस्त किया गया I
सतनामी समाज के डेलीगेट ने कुलपति के सामने प्रस्ताव रखा कि गुरु घासीदास जी की 42 अमृत वाणियां और 7 दिव्य संदेशों को पूरे परिसर में जगह जगह स्थाई रूप से लगवाएंगे साथ ही एक भव्य और सम्मानजनक जय स्तम्भ की स्थापना भी विश्वविद्यालय परिसर में किये जावे ताकि पूरे भारत वर्ष से पढने वाले विद्यार्थी गुरु घासीदास जी के सिद्धांतों से प्रेरणा ले सकेI उक्त सभी प्रस्ताव कुलपति ने सहर्ष स्वीकार लिया और बाबा गुरु घसीदास जी के आदर्शों के अनुरूप ही विश्व विद्यालय परिसर को विकसित करने की बात कही कुल पति ने डेलीगेट को बताया कि विश्विद्यालय में स्थापित गुरु घासीदास शोध पीठ से कई रिसर्च बुक प्रकाशित हो रहे हैं I
बैठक में निम्न सामाजिक जन उपस्थित रहे जितेंद्र पाटले , डॉ एस एल निराला, डॉ केके बंजारे, चंद्रशेखर बंजारे ,सुरेश दिवाकर , विजय डहरिया ,देवेंद्र गढ़ेवाल, आर एस टंडन , मधुकर घृतलहरे , नरेश घृतलहरे, अनिल बघेल , नेमसिंह बारमते, दिलहरण बंजारे , रंजीत खांडे, डॉ. मोहन शेंडे. हिरावन बंजारे, राजमहंत दशेराम खांडे, जीपी भास्कर, एच आर मनहर, एसएल जोगी, डॉ आदिले, दिनेश लहरे, मोहन महिलांग , सुखीराम सांडे , कन्हैया मधुकर, सुकृता कुर्रे , अंजू कुर्रे, रामभजन, एस एन शिव, एवं अन्य सामाजिक जन उपस्थित रहे