
*महर्षि महेश योगी की संस्था SIR फाउंडेशन के पदाधिकारियों और पटवारी पर FIR की मांग: ढीमरखेड़ा जमीन घोटाले में कलेक्टर से शिकायत*
*अपर कलेक्टर कोर्ट ने माना था फर्जीवाड़ा; 4.5 हेक्टेयर से अधिक सरकारी व पट्टे की बेशकीमती भूमि वापस मप्र शासन के खाते में दर्ज करने दिए थे आदेश*
*कूटरचित दस्तावेजों से सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर; तत्कालीन पटवारी और संस्था के मुख्तियार सुरेन्द्र तिवारी की भूमिका संदिग्ध,*
सौंपी नामजद शिकायत, भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज करने की मांग।*
कटनी। ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम बम्होरी में सरकारी और गरीब ग्रामीण के पट्टे की जमीनों को कूटनीतिक (फर्जी) तरीके से हड़पने के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। इस पूरे जमीन घोटाले के केंद्र में आई संस्था एसआर एम(SRM) फाउंडेशन को लेकर अब स्थानीय स्तर पर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। सरकारी जमीन हड़पने के मामले में संस्था के पदाधिकारियों और तत्कालीन पटवारी पर FIR दर्ज करने की मांग की गई है ।
उल्लेखनीय है कि, इस संस्था की स्थापना आध्यात्मिक गुरु परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने शिक्षा, जनकल्याण और सनातन मूल्यों को बढ़ावा देने के पवित्र उद्देश्य से की थी। लेकिन आज संस्था के वर्तमान पदाधिकारी और उनके नुमाइंदे अपने निजी स्वार्थ और लालच के चलते महर्षि जी की स्वच्छ, पावन और वैश्विक छवि को धूमिल करने में लगे हैं।
इस महा-फर्जीवाड़े को लेकर ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन’ के ढीमरखेड़ा तहसील अध्यक्ष डॉ. रणजीत पटेल ने कटनी कलेक्टर को एक औपचारिक आवेदन सौंपकर दोषियों के खिलाफ तत्काल नामजद एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
*अपर कलेक्टर कोर्ट ने माना था फर्जीवाड़ा, जमीन को मप्र शासन दर्ज करने दिए थे आदेश*
यह पूरा मामला तब और गरमा गया जब माननीय अपर कलेक्टर न्यायालय कटनी ने पूरे विषयवस्तु की सघन जांच और विधिवत सुनवाई की। कोर्ट ने अपने राजस्व प्रकरण क्रमांक 0747/बी-121/2025-26 पर 12 मई 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश पारित किया।
अपर कलेक्टर न्यायालय ने साफ माना कि शासकीय और अहस्तांतरणीय पट्टे की भूमि को कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के सहारे गलत तरीके से स्वामित्व हक में दर्ज कराया गया था। न्यायालय के आदेश के परिपालन में इस साढ़े चार हेक्टेयर से अधिक की बेशकीमती भूमि को वापस ‘मध्य प्रदेश शासन’ के खाते (मद) में यथावत दर्ज करने आदेश दिए।
*क्या था पूरा जमीन घोटाला और कैसे रची गई साजिश?*
कलेक्टर कार्यालय की आवक लिपिक शाखा में सौंपे गए आवेदन और राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह पूरा खेल दो प्रमुख खसरों पर खेला गया:
* खसरा नंबर 143 (रकबा 3.02 हेक्टेयर): यह पूरी तरह से मध्य प्रदेश शासन के मद की शासकीय भूमि दर्ज थी।
* खसरा नंबर 164 (रकबा 1.47 हेक्टेयर): यह भूमि शंकरलाल डुमार के नाम पर दर्ज शासकीय पट्टे की अहस्तांतरणीय (जिसे बेचा नहीं जा सकता) भूमि थी।
* साल 2007 में पहला खेल: भू-राजस्व संहिता के कड़े नियमों को ताक पर रखकर, संस्था के कर्मचारियों ने तत्कालीन हल्का पटवारी से सांठगांठ की। बिना सक्षम प्राधिकारी या कलेक्टर की अनुमति के, संस्था के मुख्तियार सुरेन्द्र तिवारी और अन्य पदाधिकारियों ने इस अहस्तांतरणीय व सरकारी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम पर करा ली, जो बाद में रिकॉर्ड में संस्था के नाम दर्ज हो गई।
* साल 2024 में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़: भू-माफियाओं का हौसला यहीं नहीं रुका। वर्ष 2024 में किसी अन्य पुराने आदेश की आड़ लेकर नियमों के विपरीत गलत तरीके से इसका नामान्तरण (म्यूटेशन) भी करा लिया गया और सरकारी दस्तावेजों के साथ भारी हेरफेर की गई।
*भारतीय न्याय संहिता के तहत FIR की मांग*
कलेक्टर को सौंपे आवेदन में साफ कहा है कि भले ही अपर कलेक्टर कोर्ट के आदेश से जमीन वापस सरकारी खाते में लौट आई है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड बदलने और गरीब की जमीन हड़पने वाले अपराधियों को खुला नहीं छोड़ा जा सकता। यदि इन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ये भविष्य में फिर ऐसी पुनरावृत्ति कर सकते हैं।
आवेदन में मांग की गई है कि:
पद का दुरुपयोग करने वाले तत्कालीन हल्का पटवारी,
संस्था के मुख्तियार सुरेन्द्र तिवारी,
और एस.आई.आर. फाउंडेशन के तत्कालीन व वर्तमान दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
*इन धाराओं में कार्रवाई की मांग:*संगठन ने इन सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) (जालसाजी/धोखाधड़ी), धारा 420 (धोखाधड़ी) एवं अन्य सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेजने की मांग की है।
*प्रशासन के रुख पर टिकी नजरें*
महर्षि महेश योगी के नाम और उनकी संस्था की आड़ लेकर करोड़ों की जमीनों का वारे-न्यारे करने वाले इस रसूखदार सिंडिकेट का पर्दाफाश होने के बाद अब कटनी के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि महर्षि जी ने हमेशा समाज को अध्यात्म और सही राह दिखाई, लेकिन उनके बाद आए पदाधिकारियों ने भू-माफियाओं की तरह काम कर संस्था की साख मिट्टी में मिला दी।
