
बिलासपुर छत्तीसगढ़ NSUI के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता पं. आयुष पाण्डेय ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत किया गया वार्षिक बजट पूरी तरह से दिशाहीन और जन-विरोधी है। बजट के प्रावधानों को देखकर स्पष्ट है कि सरकार ने आम आदमी की मूलभूत समस्याओं से पूरी तरह आँखें मूँद ली हैं। यह बजट विकास की वास्तविक तस्वीर पेश करने के बजाय केवल खोखले आंकड़ों और लोकलुभावन नारों का एक ‘उदासीन’ दस्तावेज मात्र है।
बजट की प्रमुख खामियां और उदासीनता के बिंदु प्रमुख रूप से
*महंगाई पर चुप्पी:* बजट में बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए कोई ठोस योजना या टैक्स कटौती का उल्लेख नहीं है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग को पूरी तरह उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
*युवा और रोजगार की अनदेखी:* प्रदेश के लाखों शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए नई नियुक्तियों या स्वरोजगार के अवसरों को लेकर सरकार के पास कोई विजन नहीं है। रिक्त पदों को भरने की दिशा में बजट पूरी तरह मौन है।
*कृषि क्षेत्र की बदहाली:* किसानों की कर्जमाफी या फसलों के उचित मूल्य (MSP) को लेकर कोई नया प्रावधान न करना सरकार की कृषि विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। सिंचाई परियोजनाओं के लिए आवंटित राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
*स्वास्थ्य और शिक्षा का गिरता स्तर:* बुनियादी ढांचे—विशेषकर सरकारी स्कूलों और अस्पतालों—के सुधार के लिए बजट में किसी क्रांतिकारी बदलाव की कमी दिखी। पुरानी योजनाओं का ही नाम बदलकर पेश कर दिया गया है।
निष्कर्ष:
यह बजट राज्य की प्रगति के पहिए को रोकने वाला है। इसमें न तो भविष्य की कोई स्पष्ट रणनीति है और न ही वर्तमान समस्याओं का समाधान। सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि न ही वह जनहित के प्रति न केवल संवेदनहीन है, बल्कि उसकी नीतियों में एक गहरी प्रशासनिक उदासीनता व्याप्त है।
“यह बजट जनता की उम्मीदों पर तुषारापात है। यह आंकड़ों की बाजीगरी है, जिसमें आम नागरिक की मेहनत का पसीना और उसकी जरूरतों का कोई स्थान नहीं है।”
