
बिलासपुर,शहर अध्यक्ष ने बताया कि यह बजट “अमृत काल” के बजाय केवल सरकार के करीबियों का बजट है.सरकार द्वारा इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न करने के फैसले को विपक्ष ने नौकरीपेशा वर्ग के साथ अन्याय करार दिया है. बजट में युवाओं के लिए रोजगार के ठोस अवसरों की कमी है. निजी निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में गिरावट के बावजूद सरकार कोई नया समाधान पेश करने में विफल रही है. सरकार पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर तो जोर दे रही है, लेकिन आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए हैं.
11 साल पहले शिक्षा का बजट टोटल बजट का 4.5% था, मोदी जी ने घटा कर 2.5% कर दिया,स्वास्थ्य खर्च जीडीपी का केवल 1.9% रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित 2.5% – 3% के लक्ष्य से बहुत कम है।
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के बजट में केवल 2.41% की वृद्धि की गई है, जो बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी कम है.
उच्च शिक्षा का बजट टोटल बजट का 2.5% था, अब 0.9% है
रक्षा का बजट टोटल बजट का 17% था, अब 13% है
और वो मेक इन इंडिया वाला बब्बर शेर मिमिया क्यों रहा है? मैनुफैक्चरिंग GDP का मात्र 12.8% क्यों?
बढ़ती मंहगाई के बीच केंद्रीय बजट में इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी प्रकार की कोई बदलाव नहीं किया गया जिसके फल स्वरूप, मध्यम वर्गीय परिवार को किसी भी प्रकार की कोई राहत नहीं प्राप्त हुई और उनके हाथ खाली रह गए।
साथ ही जानता को उम्मीद थी की नए टैक्स रेजिम में PPF, NPS, ELSS जेसी योजनाओं में टैक्स छूट दी जाएगी, पर इसमें भी कोई कदम नहीं उठाए गए।
मनेरगा का नाम बदल कर और केंद्र और राज्य का अंशदान 90-10 से बदल कर 60-40 कर दिया गया जिससे कर्ज में दबे राज्य के ऊपर अतरिक्त बोझ पड़ेगा और उसके लिए भी किसी प्रकार का कोई वित्तीय सहायता का ऐलान नही किया गया,
, स्वास्थ्य खर्च जीडीपी का केवल 1.9% रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित 2.5% – 3% के लक्ष्य से बहुत कम है।
