
– गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. अलोक चक्रवाल को तत्काल प्रभाव से पद से हटाए जाने एवं पूरे कार्यकाल की जॉच कराने हेतु निवेदन।
बिलासपुर गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में हाल ही में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर के राष्ट्रीय परिसवांद समकालीन हिन्दी कहानी बदलते जीवन संदर्भ शैक्षणिक/साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान कुलपति महोदय द्वारा किया गया आचरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक तथा विश्वविद्यालय की गरिमा के प्रतिकूल रहा है। इस घटना से न केवल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है, बल्कि देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों में भी गहरा रोष उत्पन्न हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति द्वारा अतिथियों के साथ किया गया व्यवहार, संवाद की मर्यादा का उल्लंघन तथा शैक्षणिक मंच को विवाद का केंद्र बना देना, यह दर्शाता है कि वे अपने पद की गरिमा एवं दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे हैं। मीडिया में प्रकाशित समाचारों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि यह केवल एक व्यक्तिगत आक्रोश नहीं, बल्कि संस्थागत अनुशासनहीनता का गंभीर मामला है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में कुलपति का आचरण आदर्श, संयमित एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। किंतु उपरोक्त घटना से विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वतंत्रता, संवाद की संस्कृति तथा सम्मानजनक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
कुलपति के रूप में प्रो. आलोक चक्रवाल नियुक्ति के बाद से ही विवादो में घिरे रहे एन.एस.एस कैम्प में हुए विवाद में प्राध्यापको को प्रताड़ित करना छात्र प्रतिनिधि मण्डल से नहीं मिलना, मिलने की मांग करने पर छात्र को बिना किसी कारण सीधे टी.सी दे देना। हॉस्टल में रहने वाले छात्रो की सुरक्षा की कोई मानदण्ड नहीं विश्वविद्यालय परिसर में ही छात्र की मृत्यु हो जाना जैसे कारनामे सुर्खियों में रहे। प्रो. आलोक चक्रवाल के कुलपति रहते प्राध्यापको की नियुक्ति भी विवादित रही लेन देन के आरोप लगते रहे जिससे राष्ट्रीय स्तर के इस विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचा है।
यह विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के महान संत शिरोमणी गुरूघासीदास के नाम पर स्थापित है। छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति बाहुल्य है पुरे देश से छात्र अध्ययन करने यहां आते है, कुलपति आलोक चक्रवाल के आचरण व्यवहार से विश्वविद्यालय का नाम एवं प्रतिष्ठा धुमिल हो रहा है।
अतः आपसे करबद्ध निवेदन है कि मामले की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए कुलपति को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने तथा कुलपति की कार्यकाल की समस्त नियुक्तियों एवं आदेशो की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच कराने की कृपा करें, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा एवं विश्वास बहाल हो सके।
