
जनप्रतिनिधि का अपमान समझ से परे —-
दीक्षांत समारोह में स्थानीय विधायक की उपेक्षा समझ से परे है. सत्ताधारी दल के स्थानीय विधायक होने के नाते विश्वविद्यालय प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि को उचित सम्मान मिले, अफ़सोस की बात ये कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ना तो बैठने की व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा. और ना ही कुलपति द्वारा स्वागत भासड़ में स्थानीय विधायक का नाम भी नहीं लिया ,जब कि विश्विद्यालय बेलतरा विधान सभा में आता है ,जनप्रतिनिधियों के अपमान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की जितनी निंदा की जाय कम ही है. इससे साफ़ जाहिर हो रहा है कि विश्विद्यालय पर सरकार का अंकुश नहीं है. अफ़सरशाही बेलगाम हो गया है. ? या फिर सरकार या आरएसएस के इशारे पर विधायक को किनारे लगाने का प्रयास की शुरुआत है , जब स्थानीय जनप्रतिनिधि की ये उपेक्षा कर रहे हैं, तो छात्रहित में ये क्या काम करते होंगे अंदाज़ लगाया जा सकता ह।
