संवाद कार्यक्रम में “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष” पर चर्चा

बिलासपुर,नगर विधायक अमर अग्रवाल ने अपने नियमित फेसबुक लाइव कार्यक्रम “संवाद” के 11वें संस्करण में इस बार “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष” विषय पर विस्तृत चर्चा की।

अमर अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बीते सौ वर्षों में भारत की आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है। संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक ऐसा विचार है जो हर भारतीय के भीतर राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा की भावना को प्रज्वलित करता है।

उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत की संस्कृति, एकता और आत्मगौरव की रक्षा करते हुए “हिंदू समाज के संगठन” के माध्यम से राष्ट्रशक्ति का निर्माण करना था।

कार्यक्रम में संघ की कार्यप्रणाली, शाखा व्यवस्था, स्वयंसेवकों की भूमिका तथा संघ परिवार से जुड़े प्रमुख संगठनों — भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, सेवा भारती और वनवासी कल्याण आश्रम — की सक्रिय भूमिका पर भी चर्चा हुई।

अमर अग्रवाल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर विभाजन, प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध और कोविड महामारी तक हर संकट में संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ सेवा और अनुशासन का परिचय दिया है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में संघ की नींव वर्ष 1929 में रायपुर के तिलक नगर से रखी गई थी। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 1855 से अधिक शाखाएँ सक्रिय रूप से संचालित हो रही हैं।

संघ के शताब्दी वर्ष (1925–2025) के अवसर पर देशभर में विशेष कार्यक्रम चल रहे हैं — जिनमें विजयादशमी उत्सव, गृह संपर्क अभियान, युवा सम्मेलन, सद्भाव बैठक और शाखा विस्तार जैसे आयोजन प्रमुख हैं।

संघ द्वारा प्रारंभ किए गए “पंच परिवर्तन अभियान” — कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, नागरिक अनुशासन और स्व-बोध — पर भी उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि हमारे देश का इतिहास सदैव गौरवशाली रहा है — एक समय भारत “सोने की चिड़िया” के नाम से जाना जाता था। उस युग की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने का कार्य संघ ने किया है।

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को नमन करते हुए अमर अग्रवाल ने कहा कि उनकी दूरदर्शिता और राष्ट्र के प्रति समर्पण के कारण आज भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 100 वर्ष पूर्व उन्होंने जिन चुनौतियों को पहचानकर संघ की स्थापना की थी, वही आज भारत के आत्मविश्वास की आधारशिला बनी है।

अमर अग्रवाल ने कहा कि संघ ने विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए अनेक अनुसांगिक संगठन स्थापित किए — जिनमें श्रमिक संगठन, मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच आदि शामिल हैं।

इन संगठनों ने समाज के हर वर्ग को आत्मनिर्भर और संगठित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

श्रमिक संगठनों ने “हम करेंगे पूरा काम, काम का लेंगे पूरा दाम” जैसे नारों से श्रमिक वर्ग में सम्मान और अधिकार की चेतना जगाई।

वहीं स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना वर्ष 1991 में हुई, जिसका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना था।

कार्यक्रम के समापन पर अमर अग्रवाल ने कहा —

1925 में यदि संघ की स्थापना न हुई होती, तो आज भारत का स्वरूप वैसा नहीं होता जैसा हम गर्व से देखते हैं। संघ और उसके सभी संगठन राष्ट्र निर्माण की उस प्रेरणा शक्ति के प्रतीक हैं, जो ‘राष्ट्र प्रथम’ के

संकल्प को चरितार्थ कर रहे हैं।

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