बिलासपुर, आठ बार के विधायक और अब सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंत्री पद से इस्तीफे के साथ भावुक हो कर रो पड़े , एक सुलझे हुए समझदार सबको लेकर चलने वाले बृजमोहन अग्रवाल किसी पहचाना के मोहताज नही है, राजनितिक दुश्मनी किस तरह होती है ये आज देखने को मिला , 24घंटे पार्टी कार्यकर्ता के लिए पार्टी के निर्देश पर समाज सेवा करने वाले बृजमोहन अग्रवाल का सम्मान जनता ने किया लेकिन पार्टी ने सांसद बना कर राज्य के मंत्री पद को छीन लिया, जो दीन रात पार्टी की सेवा करता है लोगो के लिए खड़ा रहता है ऐसे काबिल नेता का मंत्री नही रहना पार्टी के लिए नुकसानदेह है, सबको जोड़ कर काम करने वाले बृजमोहन अग्रवाल का इस्तीफे के बाद भावुक हो कर छलक जाना स्वाभाविक है, जिस नेता की इतनी बडी जनस्विकरोक्ति हो उससे राज्य के मंत्री पद से हटाया जाना दुखद है , बृजमोहन ने पार्टी आदेश को माना सांसद का चुनाव लडे और अब मंत्री पद से पार्टी के कहने पर इस्तीफा दे दिया, ये एक कार्यकर्ता ही कर सकता है, बृजमोहन के मंत्री पद से हटने से पदेश के लाखो कार्यकर्ता मायूस हुए है उनके सामने अंधेरा छा गया है,एक मजबूत खंबे की तरह कार्यकर्ता और पार्टी के लिए खड़े रहने वाले बृजमोहन को पाना कठिन है, ऐसे दुर्लभ कार्यकर्ता की ऐसी बिदाई नही हो सकती। आज कार्यकर्ता का कलेजा मुंह को आ गया है, आज कोई शायद ही सो पाए, जननेता के ऐतिहासिक जीत का ऐसा इनाम भी हो सकता है?
