12 माह काम करने के बाद भी भी इंक्रीमेंट का भुगतान न करने::; इंक्रीमेंट ना देने का मामला*सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला:::हाईकोर्ट के निर्देश से मिली राहत::::: 30 जून को सेवानिवृत्त होने पर एनुअल इंक्रीमेंट का मामला:::
बिलासपुर-दुर्ग जिला के अंतर्गत कौशल नगर भिलाई के रहने वाले रिटायर उप पुलिस अधीक्षक गोराचंद पति एवं बिलासपुर जिले के अंतर्गत बिलासपुर नगर के रहने वाले रिटायर सहायक संचालक जिला रेशम कार्यालय एके बाजपेई डीसी उपाध्याय लक्ष्मीकांत दीक्षित एवं श्रीमती नसीरन कुरेशी रिटायर लेखापाल ने अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत हाईकोर्ट में इस आशय की याचिका पेश की थी कि उन्हें 30 जून को रिटायर होने के बाद एक इंक्रीमेंट से वंचित कर दिया गया है जबकि उन्होंने पूरे 12 माह कार्य कर 1 जुलाई के स्थान पर 30 जून को रिटायर हो गए हैं और उन्हें जो इंक्रीमेंट 1 जुलाई को भुगतान किया जाना था उसका भुगतान केवल इस कारण नहीं किया गया क्योंकि वह 30 जून को सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि वास्तविकता यह है कि उन्होंने 12 माह कार्य कर लिए थे इसलिए उन्हें एक इंक्रीमेंट का लाभ दिया जाना था इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए याचिका पेश कर एक इंक्रीमेंट दिए जाने हेतु याचिका पेश की थी जिस पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस पी सेम कोसी ने हाल ही में दिए सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत व निर्देश का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं की इस आशय की याचिका का निराकरण किया है कि याचिकाकर्ता गण जोकि 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे और उन्हें प्रति वर्ष 1 जुलाई को एनुअल इंक्रीमेंट दिया जाता था उन्हें 30 जून को रिटायर होने पर 12 माह का काम पूरा कर लेने के बाद भी एक इंक्रीमेंट से वंचित कर दिया गया जिस पर आदेशित किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित दिशा निर्देशों का पालन करते हुए याचिकाकर्ताओं को एक इंक्रीमेंट दिए जाने के संबंध में निर्देश जारी किया गया है।।।जज पी सेम कोशी ने ३०जून को रिटायर हुए कर्मियो की याचिका पर सुनवाई कर विभाग को रिटायर्ड कर्मी को एक साल के इन्क्रीमेंट देने सम्बधी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एनुअल इंक्रीमेंट के संबंध में पारित निर्णय वा दिशानिर्देशों के आधार पर तथा उक्त पारित न्याय दृष्टांतो के आधार पर याचिकाकर्ताओं को इंक्रीमेंट दिए जाने के संबंध में निर्देश जारी किया है । ज्ञातव्य हो कि याचिकाकर्तागण ने जब विभाग के द्वारा और शासन के द्वारा उन्हें इंक्रीमेंट देने से इंकार कर दिया गया तब उन्होंने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करवाया था कि वे राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अंतर्गत कार्यरत रहते हुए ३० जून को रिटायर हुए थे उन्हें प्रतिवर्ष १जुलाई को इन्क्रीमेंट का लाभ मिलता था परंतु ३०जून को रिटायर होने से उन्हें पूरे एक वर्ष कार्य करने के बाद भी एक इन्क्रीमेंट का भुगतान रिटायरमेंट के कई साल बाद भी नहीं किया गया है साथ ही पेंशन भी कम निर्धारित की गई है जिससे अभित्रस्त हो रिट याचिका अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत पेश करवाया था जिसपर सुनवाई कर विभागो के सचिव एवं सचिव गृह पुलिस विभाग स्वास्थ्य विभागस्कूल शिक्षा विभाग व वित्त सचिव छत्तीसगढ़ सहित अन्य को निर्देश जारी किया है।

