बिलासपुर-रायपुर निवासी योगेश नारायण शर्मा में उप निरीक्षक ( सब इंस्पेक्टर ) के पद पर पदस्थ थे । उक्त पदस्थापना के दौरान उनके विरूद्ध कुछ शिकायते प्राप्त होने पर पुलिस महानिदेशक द्वारा दिनांक 16.09.2020 को एक दण्डादेश पारित कर एक वेतनवृद्धि एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया गया । माह दिसम्बर 2022 में निरीक्षक ( इंस्पेक्टर ) पद पर प्रमोशन से इस आधार पर वंचित कर दिया गया कि योगेश शर्मा के विरुद्ध एक विभागीय सजा है । उक्त कार्यवाही से क्षुब्ध होकर योगेश नारायण शर्मा द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से रिट याचिका दायर की गई । अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि असचयी रूप से वेतनवृद्धि रोके जाने के दण्ड का प्रभाव सिर्फ 1 ( एक ) वर्ष तक के लिये रहता है जिसका प्रभाव दिनांक 30 जून 2022 को समाप्त हो चुका है । अतः याचिकाकर्ता दिसंबर 2022 में जब अन्य उपनिरीक्षकों को निरीक्षक ( इंसपेक्टर ) के पद पर प्रमोशन दिया गया उक्त दिनांक से इंसपेक्टर पद पर प्रमोशन का पात्र है अधिवक्तागण द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य विरुद्ध एस . सी . पारासर के बाद में समान मामले में पारित न्याय दृष्टांत का हवाला दिया गया उच्च न्यायालय , द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् रिट याचिका को स्वीकार कर पुलिस महानिदेशक ( डी.जी.पी. ) को यह निर्देशित किया गया कि उक्त दण्डादेश की समाप्ति के पश्चात याचिकाकर्ता को माह दिसम्बर 2022 से निरीक्षक ( इंसपेक्टर ) पद पर प्रमोशन हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदन का निराकरण कर पात्र पाये जाने पर निरीक्षक ( इंसपेक्टर ) पद पर प्रमोशन प्रदान करें ।

