32 करोड़ का जल संसाधन का मकबरा, अधीक्षण अभियंता संजय पाठक की देन,एनीकट में बना दिया गलत गेट ,7 करोड़ का गेट 12 करोड़ पहुंचा।

बिलासपुर- जल संसाधन को अधिकारियों ने नोट छापने की मशीन बना ली है जनता के पैसे जो सरकार कर्ज लेकर देती है उसे कैसे जेब मे भरना है इसका बेहतर नमूना कोटा मरवाही विधानसभा के इलाके में बना आमामुड़ा का एनीकट है, न यंहा पानी भरता है न किसानों को सिंचाई सुविधा मिलती है , कारनामा करने वाले यंहा के तत्कालीन एसडीओ इएण्डम संजय पाठक ने गलत गेट का चयन किया जिसकी जरूरत नही थी, अब उसे बदलने के लिए नया टेण्डर करने की तैयारी है ,जिस गेट की यंहा जरूरत नही उस गेट को लगा दिया और ये डेम का गेट काम नही कर रहा जंग खा गया है,सालों से इसका उपयोग नही हुआ है , और इस गेट के मेनटेनस के नाम पर लाखों रुपए निकल रहे है, डेम की हाल बेहद खराब है ,गलत साइट पर पहले डेम बना है ,ऊपर से इएण्डम ने गलत गेट बना दिया जो अब खुलता नही है पानी रोकने के लिए बनाए गए डेम में पानी रुकता ही नही। नाबार्ड से कर्ज लेकर सरकार ने जलसंसाधन विभाग को 32 करोड़ के लगभग की रकम किसानों औऱ लोगो जनकल्याण के लिए काम करने के लिए दी थी ,लेकिन आज ये जलसंसाधन के मकबरे से कम नही है ,दरअसल इएण्डम के अधीक्षण अभियंता 29 साल यंही पदस्थ है किसी सरकार ने उनको हटाने की हिम्मत नही की , उप अभियंता से भर्ती संजय पाठक गृह जिले में प्रमोशन से एसई बन गए कभी तबादला नही हुआ इसकी वजह क्या होगी इसको बताने की आवश्यकता नही है।कम कीमत के अच्छे गेट से काम हो सकता था लेकिन मंहगा गेट क्यों लगाया समझ से परे है और इसे बदलने की तैयारी है। इस मामले में एसई संजय पाठक से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नही उठाया।

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