बीजेपी से नाराज क्यो है आदिवासी वोटर।

बिलासपुर- 15 साल बीजेपी की सरकार की ऐसा काम किया कि आदिवासी वोटर और प्रदेश का वोटर उनसे नाराज हों गया ,15 साल की रमन सरकार ने एसटी एसीसी के साथ हर वर्ग को नाराज किया ,नतीजा 15 सीट सामने है ,बीजेपी से आदिवासी नाराज हुए सरगुजा बस्तर साफ हो गया ये बीजेपी के लिए चिंता का विषय है, खासकर केंद्रीय नेताओं के लिए ये जानने का विषय है, जो यंहा के भाजपाई नेता की कर्मकांड से परिचित नही है यंहा के नेता पार्टी की नही अपनी चिंता ज्यादा करते है पार्टी की नही पार्टी लगातार गर्त में जा रही है और आगे इससे भी बुरी हालत होने वाली हो सकता हॉ अगले चुनाव में एक दो सीट बीजेपी को मिले तो आश्चर्य की बात नही होगी ,भाजपा के वर्तमान प्रभारी ओम माथुर हवा में जमीन सच्चाई से सभी प्रभारी नावाकिफ है।आदिवासी समाज का वोटर बीजेपी से नाराज है इसलिए उनके खिलाफ विधानसभा में वोट किया अगली बार भी यही होना है, 15 साल में वही वही चेहरा देख कर सब नाराज हो गए आदिवासी भाजपा के पुराने विधायक अपने समाज को संभाल नही सके उनकी बात पार्टी तक नही पहुंचा सके , आदिवासी समाज की कुछ मांगे थी जिसे रमन सरकार ने ध्यान नही दिया सत्ता तो बीजेपी को मिली लेकिन पार्टी को15 साल के नेताओं ने खत्म कर दिया, पार्टी के नेताओं की कार्यशैली अभी भी वही है , बची खुची बीजेपी को खत्म करने के प्लानिंग अभी भी जारी है,आदिवासी समाज को अभी भी पार्टी के नेता वोट बैंक समाज रहे है कोई वास्तविक चर्चा नहीं कर रहा है, पहले आदिवासियों को केंद्र ने परिसीमन में निपटाया ,फिर उनको आरक्षण में निपटाया और भाजपा के नेता जेब भरने में लगे रहे कल तक जिनके पास एक कार नही थी व्व और उनके व्यपारी समर्थक हजारो करोड़ के मालिक है ये सब एसटी एससी ओबीसी वोटरों की उपेक्षा करके होता रहा , रमन सरकार कानो तक बात पहुंची लेकिन अवैध कमाई ने इनके कान ने बातों को अनसुना कर दिया ,नतीजा सामने है सत्ता की डोर टूट गई, छत्तीसगढ़ में 15 साल बीजेपी ने नही व्यपारी मठाधीशों नके साथ रमन सिंह और उनके मंत्रियों ने काम का किया ,मंत्री विधायक आज आलीशान महलनुमा घरों में रह रहे है और पार्टी गर्त में है कार्यकर्ता की सुनवाई नही है , केंद्रीय नेताओ से सीधी बात करने की कोई व्यवस्था नही है , केंद्रीय नेता छत्तीसगढ़ में उसी नेता से बात करते है जिसके पास बीजेपी की स्थायी फ्रेंचाइजी है ,कार्यकर्ता मोदी और अमित शाह से कुछ करने की उम्मीद में है लेकिन हालात ऐसे नही दिख रहे है कि उनके तक कुछ बात पहुंच पाएगी, आदिवासी तीसरे मोर्चे पर विचार कर रहे है अगर सार्थक हो गई तो बीजेपी का छत्तीसगढ़ में कोई नामलेवा नही रहेगा ,किसानों के साथ हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले भूपेश का टक्कर करने का माद्दा फिलहाल बीजेपी में नही है , केंद्र के दबाव से भूपेश सरकार सिम्पथि ही गेन कर रही है ।वनोपज पर भरपूर समर्थन मूल्य बढ़ाकर आदिवासियों को राहत दी है।छत्तीसगढ़ भाजपा की फ्रेंचाइजी से वर्तमान में बीजेपी का भला नही हो सकता,।

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