बिलासपुर- कांकेर निवासी के . के . कुमरे की वर्ष 1979 में पंचायत विभाग में ग्राम सहायक के पद पर नियुक्ति हुई थी । सेवाकाल के दौरान उनका वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षण एवं करारोपण अधिकारी के पद पर प्रमोशन हुआ एवं 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर वे सेवानिवृत्त हो गए । सेवाकाल के दौरान के के कुमरे को प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान न दिये जाने से क्षुब्ध होकर के . के . कुमरे द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम SD with Watermark . 4G Case No. W.P.S ) No. 4508/2022 Judge Shri P.P. Sahu से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई । अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 28.04.2008 को जारी सर्कुलर के तहत् छत्तीसगढ़ शासन के अधीन कोई भी शासकीय कर्मचारी अपने सेवाकाल के 10 ( दस ) 20 ( बीस ) वर्ष की सेवाकाल के पश्चात् प्रथम , द्वितीय समयमान वेतनमान का पात्र है एवं छ.ग. शासन द्वारा दिनांक 08.08 . 2018 को जारी सर्कुलर के तहत् सभी शासकीय कर्मचारी 30 ( तीस ) वर्ष की सेवाकाल के पश्चात् तृतीय समयमान वेतन के पात्र हैं , चूंकि याचिकाकर्ता की वर्ष 1979 में प्रथम नियुक्ति हुई थी एवं 38 ( अड़तीस ) वर्ष की सेवा के पश्चात् वे सेवानिवृत्त हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 28.04.2008 एवं दिनांक 08.08.2018 को जारी सर्कुलर के तहत् वे 10 वर्ष , 20 वर्ष एवं 30 वर्ष की सेवाकाल के पश्चात् प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान के पात्र हैं । उच्च न्यायालय , बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् रिट याचिका को स्वीकार कर संचालक पंचायत विभाग एवं उप संचालक , पंचायत विभाग , राजनांदगांव को यह निर्देशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण कर नियमानुसार प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान का भुगतान करें

