बिलासपुर-राज्य सरकार के द्वारा आरक्षण संबंधी विधयेक जो विधानसभा में 02 दिसम्बर 2022 को पारित करके राज्यपाल को स्वीकृति हेतु भेजा गया था , जिसे राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 200 के तहत संविधान के विपरीत रोके रखा है । उनके इस कार्यप्रणाली से पीडित होकर राज्य शासन ने उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करते हुए उनसे नोटिस जारी कर जवाब मंगवाने का निवेदन किया था । 87 उपरोक्त मामले की सुनवाई उपरांत उच्च न्यायालय के बेंच न्यायमूर्ति श्रीमती रजनी दुबे के द्वारा राज्यपाल को नोटिस जारी करते हुए 02 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है । राज्य शासन की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल वरिष्ठ अधिवक्ता एवं महाधिवक्ता सतीश चन्द्र वर्मा ने पक्ष रखा गया , उन्होनें यह बताया कि राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 200 के अंतर्गत 03 तरह के ही अधिकार प्राप्त है जिसमें या तो वे बिल हस्ताक्षर करे , या बिल वापस करे या राष्ट्रपति को प्रेषित करें । किन्तु उक्त मामले में तीनों ही प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए राज्यपाल ने राजनीतिक लाभ के लिए बिल को संविधान के विपरीत रोके रखा जो कि संविधान विरूद्ध कृत्य है । उपरोक्त तर्क के बाद उच्च न्यायालय ने राज्यपाल को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने निर्देशित किया । बिलासपुर पहुंचे सीनियर अधिवक्ता कपिल सिब्बल के स्वागत के लिए पर्यटन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव और जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रमोद नायक पहुँचे ,जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष ने कपिल सिब्बल को आरक्षण मामले में वस्तु स्थिति से भी अवगत कराया और बताया कि आदिवासियों के साथ साथ पिछड़ा वर्ग की बड़ी जनसंख्या छत्तीसगढ़ में निवास करती है जिसके चलते सरकार ने उनके भी हीर का संरक्षण किया है।

