बिलासपुर– 15 साल बीजेपी की सरकार रहने के बाद भी बीजेपी सीएम घोषित करके चुनाव लड़ने से घबरा रही है,इसकी वजह पार्टी की अंतर्कलह को माना जा रहा है ,पार्टी में गुटबाजी चरम पर है पुराण ग्रुप नए ग्रुप को पचा नही पा रहा ,यंहा के नेता साफगोई से अपना काम करते है इसको केंद्रीय संगठन नही पकड़ पाएगा , अमित शाह ओम माथुर को भी खूब ताकत लगानी पड़ेगी, नए अध्यक्ष अरुण साव से कार्यकर्ता ने बहुत आशा और उम्मीद की थी कि कार्यकर्ताओं का भला होगा लेकिन नई नियुक्तियों में पुराने नेताओँ के चहेतों को ही जगह मिली इससे इससे जो कार्यकर्ता अरुण साव के अध्यक्ष बनने से खुश थे फिर मायूस हो गए है उनका कहना है कि ऐसे में उनका क्या भला हुआ ,पुराने नेटाओ के चहेते फिर नई नियुक्ति पा गए ,जो नाराज कार्यकर्ता था वो अभी भी नाराज है, ओम माथुर के लिये छत्तीसगढ़ को संभालना आसान नही होगा,। ओम माथुर भी पुराने नेताओं से भयभीत लगता है इसलिए कड़ा निर्णय नही ले पा रहे है ,कार्यकर्ता प्रभारी ओम माथुर की ओर देख रहा है कि कुछ अच्छा होगा लेकिन कब ,15 साल जिन नेताओं ने सत्ता की रेवड़ी खाई अभी भी उन्ही को तवज्जो मिल रही , जो कार्यकर्ता जमीन पर पार्टी के लिए माहौल बनाता है उसको तवज्जो नही है , बीजेपी का कार्यकर्ता मानता है कि ऊपर बैठे लोग भी पैसे वाले नेताओं की ओर देखते है छोटे कार्यकर्ताओं की तरफ क्यों देखेंगे, दरअसल संगठन में कार्यकर्ताओं को ज्यादा सम्मान नही मिल रहा है, बीजेपी में सत्ता आती है तो ठेकेदारों को ज्यादा जगह मिलती है, कार्यकर्ता पार्टी से रूष्ट है, इन कारणों से बीजेपी छत्तीसगढ़ में सीएम का चेहरा शायद आगे नही कर रही है ,युवा आदिवासी चेहरे को भी आगे कर सकती है लेकिन हिम्मत नही जुटा पा रही है, बीजेपी में सब संगठन की लाइन पर चलते है इसलिए कोई नेता नही बन पा रहा है, स्थानीय स्तर पर मुद्दों को बीजेपी नही उठा पा रही है, मोदी की योजना का प्रचार प्रसार नही कर पा रही हैं, स्मार्ट सिटी में पैसे का दुरूपयोग हो रहा है ,बीजेपी मौन है ।जनता के पैसे को अधिकारी मनमानी खर्च रहे है, इस सब का नुकसान बीजेपी को ही होगा , जनता के लिए लड़ते नही दिख रहे है , कार्यकर्ता नाराज है कैसे बीजेपी की नैया पार होगी, भूपेश योजनाओं के चलते बीजेपी के पास जवाब नही है।

