बिलासपुर-राजनांदगांव निवासी अमितेश दास वैष्णव शास . दिग्विजय महाविद्यालय , राजनांदगांव में लैब अटेण्डेन्ट के पद पर पदस्थ थे । उक्त पदस्थापना के दौरान सचिव , उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एक आदेश जारी कर अमितेश वैष्णव का स्थानांतरण शास . महाविद्यालय , डौण्डी , जिला – बालौद कर दिया गया । चुंकि अमितेश वैष्णव 60 प्रतिशत दिव्यांग है एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है अपने स्थानांतरण आदेश से क्षुब्ध होकर अमितेश दास वैष्णव द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई । अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि छत्तीसगढ़ शासन , सामान्य प्रशासन विभाग , रायपुर द्वारा दिनांक 30.08.2010 को निःशक्त कर्मचारियों के सम्बन्ध में यह प्रावधान किया गया है कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के निःशक्त ( दिव्यांग ) कर्मचारियों की पदस्थापना उनके गृह जिले के भीतर एवं जन्म स्थान के नजदीक की जाएगी । इसके साथ ही छ.ग. शासन , सामान्य प्रशासन विभाग , रायपुर द्वारा 12 अगस्त 2022 को जारी स्थानांतरण नीति के पैरा 1.6 में यह प्रावधान किया गया है कि दिव्यांग शासकीय सेवकों की पदस्थापना आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक स्थान पर की जाए । चूंकि याचिकाकर्ता 60 प्रतिशत दिव्यांग है एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है ऐसी स्थिति में जिला राजनांदगांव से जिला- बालौद किया गया स्थानांतरण , स्थानांतरण नीति का घोर उल्लंघन है । उच्च न्यायालय , बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् मामले को गंभीरता से लेते हुए रिट याचिका को स्वीकार कर चतुर्थ श्रेणी दिव्यांग शासकीय कर्मचारी अमितेश दास वैष्णव के विरूद्ध जारी स्थानांतरण आदेश पर स्थगन ( स्टे ) कर दिया गया ।

