राजस्थान विद्युत् निगम और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ” अगली सुनवाई तक कोई पेड़ कटाई नहीं की जायेगी “-सुप्रीम कोर्ट

बिलासपुर- केंद्र सरकार को डब्लू आई आई और आई सी ऍफ़ आर ई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश

हसदेव अरण्य में राजस्थान और अडानी की खदानों का मामला

– अगली सुनवाई १३ नवम्बर के बाद

बिलासपुर – अक्टूबर सुप्रीम कोर्ट में हसदेव अरण्य क्षेत्र की राजस्थान विद्युत् निगम को आवंटित खदानों की वन अनुमति को चुनौती देने वाले मामले में राजस्थान विद्युत् निगम और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ” अगली सुनवाई तक कोई पेड़ कटाई नहीं की जायेगी ” . इस कथन के बाद कोर्ट ने सुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने का निवेदन स्वीकार कर लिया . गौर तलब है कि १३ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आई सी ऍफ़ आर ई द्वारा केंद्र सरकार को • प्रस्तुत सारी रिपोर्ट्स अगली सुनवाई तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया था . आई सी ऍफ़ आर ई की रिपोर्ट दो भ्हाग में है जिसमे भाग दो डब्लू आई आई द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट है जो वन्य प्राणी आदि प्रश्नो पर प्राथमिकता से राय देती है . आज यह रिपोर्ट्स प्रतुत ना हो पाने के कारण केंद्र सरकार की और से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में समय की मांग की और कहा की इसकी सुनवाई दिवाली की छुट्टी के बाद की जाए संभव हो तो सुनुवाई १३ नवंबर के बाद की जाए , प्रकरण में एन जी टी के समक्ष याचिकाकर्ता रहे और सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी नंबर एक सुदीप श्रीवास्तव की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और अधिवक्ता नेहा ने कहा सुनबाई बढ़ने में आपत्ति नहीं है परन्तु राजस्थान विद्युत् उत्पादन निगम और सरकार के द्वारा आगे कोई पेड़ों की कटाई नहीं होनी चाहिए । इस प्रकरण के साथ ही अंबिकापुर निवासी अधिवक्ता डी के सोनी की एक जनहित याचिका भी सुनवाई के लिए साथ लगी है जिसमे राजस्थान विद्युत् उत्पादन निगम द्वारा अडानी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम बना कर सभी खदान अडानी के हवाले कर देने को चुनौती दी गई है . गौरतलब है की उक्त अनुबंध सुप्रीम कोर्ट के द्वारा २०१४ के फैसले में ही अवैध घोषित हो चूका है और इस कारण राजस्थान का कोल ब्लॉक भी उस समय रद्द हुआ था , बाद में केंद्र सरकार ने नया कानून बना कर कोल् ब्लॉक पुनः आवंटित किये परन्तु इसी कानून में २६ % से अधिक शेयर निजी कंपनी को होने या खदान से उपजित किसी भी हित को निजी कंपनी को ट्रांसफर करने पर प्रतिबन्ध है . साथ ही इस अनुबंध के कारण राजस्थान विद्युत् उत्पादन निगम को अपना ही कोयला अडानी से खरीदना पद रहा है और वह भी कोल इंडिया से भी महंगे दरों पर . इसके कारण राजस्थान के उपभोक्ताओं को बिजली भी मंहगी पड़ रही है . इस ममम्ले में १३ सितंबर की सुनवाई में कोयला मंत्रालय को भी नोटिस जारी हुआ था परन्तु उसकी ओर से अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है .

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