बिलासपुर- वोट की राजनीति के बीच कभी है राम तो कभी गांधी शेयर बाजार की तरह ऊपर नीचे होते रहते है ,राजनीति में सत्ता पाने के लिए जो बिक जाए राजनेता उसे बेचने के लिए हमेशा तैयार रहते ,केजरीवाल कुछ बेच कर सत्ता में आ गए किसी को कुछ समझ नही ये भी शोध का विषय है। गांधी और राम के बीच केजरीवाल ने कुछ नया बेच कर सत्ता हथिया ली ,अब देश में फिर आम चुनाव में क्या बिकेगा और जोरदार बिकेगा इस पर घमासान चल रहा है ,राजनेता सत्ता पाने के लिए पार्टी में कभी लोकतंत्र तो कभी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड बना देते है। गांधी को आज सभी याद कर रहे है ,कोई मन से याद कर रहा है कोई बेमन से इन सब से अलग गांधी से अटूट प्रेम करने वाला वर्ग है जो 24×7 याद करता है वो भ्रष्ट्राचारी लोग ,लेकिन ऐसे गांधी प्रेमियों की आवश्यकता नही है लेकिन मायाजाल इन्ही के गांधी का है जो राम और रहीम के गांधी से बड़े है। खैर जिस तरह से गांधी का के नाम लेने वाले बढ़े है उससे लोगो मे चर्चा है कि अगर सब गांधी के है तो झगड़ा किस बात का है। आज सब गांधी का रूप धर कर चल रहे है पर बन कोई नही पा रहा है , गांधी बनने के लिये किसी गुफा में तपस्या करने की जरूरत नही आप केवल आम जनता बन जाये ,तब न गांधी की जरूरत पड़ेगी न राम की ।

