(आपराधिक मामला एवं विभागीय जाँच नही चल सकते एक साथ)
बिलासपुर,, नवा रायपुर निवासी अनामिका जैन पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) रायपुर में पुलिस विभाग में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडीशनल एसपी) के पद पर पदस्थ है। वर्ष 2020 में उनकी जिला दुर्ग में पदस्थापना के दौरान भिलाई निवासी के. व्ही. अरूण की शिकायत पर अनामिका जैन के विरूद्ध पुलिस थाना पुरानी भिलाई में एक अपराध पंजीबद्ध किया गया था, उक्त मामले में चालान प्रस्तुत किए जाने पर सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, गृह विभाग द्वारा एडीशनल एसपी अनामिका जैन के विरूद्ध आरोप पत्र जारी कर विभागीय जाँच कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई। उक्त विभागीय जाँच कार्यवाही से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई। अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में कैप्टन एम. पॉल एन्थनी विरूद्ध भारत गोल्ड माईन्स लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य विरूद्ध नीलम नाग एवं अन्य (2016), अविनाश सदाशिव भोसले विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य (2012) के वाद में यह न्यायदृष्टांत प्रतिपादित किया गया है कि यदि किसी शासकीय अधिकारी के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया जाता है एवं न्यायालय के समक्ष आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है ऐसी स्थिति में उक्त शासकीय अधिकारी के विरूद्ध उनके संबंधित विभाग द्वारा समान आरोपो पर विभागीय जाँच कार्यवाही संचालित कर दंडित नही किया जा सकता है, इसके साथ ही यदि आपराधिक मामले एवं विभागीय जाँच कार्यवाही में अभियोजन साक्षी समान है तो पहले उक्त अभियोजन साक्षियो का कथन आपराधिक मामले में लिया जाना अनिवार्य है तब तक विभागीय जॉच कार्यवाही स्थगित रखी जानी चाहिए, चूँकि याचिकाकर्ता के मामले में जिन आरोपो पर आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है उन्ही आरोपो एवं समान गवाह के आधार पर याचिकाकर्ता के विरूद्ध विभागीय जाँच कार्यवाही संचालित की जा रही थी जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्यायदृष्टांत का घोर उल्लंघन है। उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका को स्वीकार कर याचिकाकर्ता एडीशनल एस.पी. के विरूद्ध संचालित विभागीय जाँच कार्यवाही पर स्थगन (स्टे) कर दिया गया।