शरद पूर्णिमा पर गायत्री परिवार बिलासपुर एवं मानस सत्संग परिवार के संयुक्त तत्त्वावधान में अर्धनारीश्वर मंदिर परिसर में साप्ताहिक मानस सत्संग की 28वीं कड़ी आयोजित
दिनेश भारती गोस्वामी, शिवम महाराज और रविशंकर दुबे ने मानस के आदर्शों पर दिया संदेश; विनोद साहू के नेतृत्व में हुआ आयोजन
दल्हा पहाड़, अक्टूबर। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को दल्हा पहाड़ की तलहटी स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर प्रांगण में साप्ताहिक मानस सत्संग की 28वीं कड़ी का आयोजनश्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। श्रीरामचरितमानस पर केंद्रित इस सत्संग का विषय “अवध में सीताजी का अभिनंदन—महाराज दशरथ के भाग्य की सराहना” रहा। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, मानस मर्मज्ञों, गायत्री परिवार के साधकों तथा बड़ी संख्या में मानस प्रेमियों ने सहभागिता की।
मानस मधुकर आचार्य दिनेश भारती गोस्वामी ने अपने विस्तृत उद्बोधन में सीताजी के अवध आगमन और उनके अभिनंदन के प्रसंग की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक व्याख्या की। उन्होंने कहा कि सीताजी का व्यक्तित्व त्याग, शील, करुणा, धैर्य और मर्यादा का अद्भुत समन्वय है। महाराज दशरथ के भाग्य की सराहना केवल एक आदर्श पुत्रवधू के आगमन की प्रसन्नता नहीं, बल्कि उन संस्कारों और जीवन-मूल्यों का सम्मान है, जिनसे परिवार और समाज समृद्ध होते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीरामचरितमानस के पात्र हमें जीवन के प्रत्येक संबंध को प्रेम, विश्वास और कर्तव्यबोध के साथ निभाने की प्रेरणा देते हैं। सीताजी के चरित्र में आत्मसम्मान, धैर्य और समर्पण का जो स्वरूप दिखाई देता है, वह आज भी परिवार और समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि मानस का अध्ययन तभी सार्थक है, जब उसके आदर्श हमारे व्यवहार, विचार और आचरण में दिखाई दें।
श्रद्धेय शिवम जी महाराज, सहज योग आश्रम, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश ने अपने आशीर्वचन में सत्संग, साधना और आत्मचिंतन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में बाहरी उपलब्धियों के साथ आंतरिक शुद्धता और मानसिक शांति भी आवश्यक है। सत्संग व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकने, अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर देता है। जब मनुष्य अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण प्राप्त करता है, तभी उसके जीवन में प्रेम, करुणा और सद्भाव का विकास होता है। उन्होंने श्रीरामचरितमानस के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि रामकथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने की साधना है। परिवार में परस्पर सम्मान, समाज के प्रति संवेदनशीलता और जरूरतमंदों की सेवा जैसे कार्य आध्यात्मिक जीवन के वास्तविक परिचायक हैं। उनके उद्बोधन ने उपस्थित साधकों को भक्ति के साथ सदाचार और सेवा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।
रविशंकर दुबे ने अपने उद्बोधन में श्रीरामचरितमानस की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानस भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का महत्त्वपूर्ण आधार है। सीताजी के अभिनंदन का प्रसंग हमें सिखाता है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक सम्मान उसके गुणों, संस्कारों और आचरण के आधार पर होना चाहिए। परिवार में नए संबंधों को स्नेह, आत्मीयता और सम्मान के साथ स्वीकार करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा की विशेषता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भौतिकता, स्वार्थ और आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण संबंधों में संवेदनशीलता प्रभावित हो रही है। ऐसे में रामचरितमानस के आदर्श परिवारों में विश्वास, समाज में सद्भाव और जीवन में नैतिकता को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने मानस के प्रसंगों को केवल धार्मिक दृष्टि से देखने के बजाय उनके सामाजिक और व्यावहारिक संदेशों को समझने पर बल दिया। उनके अनुसार, रामकथा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को बेहतर इंसान बनाना और समाज में मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा करना है।
डॉ. (श्रीमती) रमाकांति साहू सहित अन्य वक्ताओं ने भी मानस के आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व पर अपने विचार रखे। डॉ. शिवदयाल पटेल ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए साप्ताहिक मानस सत्संग की परंपरा, उसके उद्देश्य और सामूहिक आध्यात्मिक संवाद की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री परिवार गायत्री प्रज्ञापीठ, लिंगियाडीह, बिलासपुर की ब्रह्मवादिनी बहनों श्रीमती कांति किशोर, श्रीमती उषा साहू, श्रीमती गीता साहूm श्रीमती गौरी थवाईत, श्रीमती माया श्रीवास, डॉ भूमिका साहू, डॉ इंदु सक्सेना, श्रीमती तेजस्विनी थवाईत के द्वारा मंगलाचरण, अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और शंखनाद से हुआ। श्रीमती कांति किशोर, गीतादेवी साहू एवं श्रीमती सुनयना गौर ने गुरु-ईश वंदना प्रस्तुत की। श्रीमती कमलादेवी साहू ने अर्धनारीश्वर स्तुति प्रस्तुत की, जबकि कुमारी उपासना साहू एवं श्रीमती प्रतिभा साहू ने “हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की…” गीत प्रस्तुत किया। रामप्रसाद साहू ने “जरा देर ठहरो राम…” गीत और चूड़ामणि सिदार ने भावपूर्ण भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि शशीप्रकाश पाण्डेय, महादेव नेताम एवं एन.एन. थवाईत ने भी विचार साझा किए। मानस प्रेमियों की सहभागिता से सत्संग चर्चा आयोजित हुई। इस अवसर पर सम्मान-अभिनंदन, पदमलोचन श्रीवास एवं वेदप्रकाश थवाईत द्वारा “हमारा युग निर्माण सत्संकल्प” का सामूहिक वाचन, श्रीमती सुनयना गौर का आभार प्रदर्शन तथा ब्रह्मवादिनी बहनों का शांतिपाठ हुआ। मंचीय कार्यक्रम के समापन के बाद सामूहिक सुआ नृत्य प्रस्तुत किया गया।
आयोजन की संपूर्ण व्यवस्थाओं एवं दायित्वों का निर्वहन विनोद कुमार साहू के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में सोनपुरी बाबा (अर्धनारीश्वर आश्रम, दल्हा पहाड़), हरनारायण साहू, श्रीमती रामेश्वरी साहू, श्रीमती जया साहू, कुमारी रोशनी साहू, रामप्रसाद साहू, श्रीमती उर्मिला साहू, श्लोक साहू, कुमारी गार्गी, श्रीमती कांति किशोर, बलराज किशोर, श्रीमती गौरी थवाईत, एन.एन. थवाईत, विनोद कुमार साहू, गीतादेवी साहू, डॉ. शिवदयाल पटेल, श्रीमती सरोज पटेल, श्रीमती खगेश्वरी दुबे, रविशंकर दुबे, डॉ. (श्रीमती) रमाकांति साहू, डॉ. गौरीशंकर साहू, डॉ. (श्रीमती) भूमिका साहू, शशीप्रकाश पाण्डेय, श्रीमती शारदा पाण्डेय, कुमारी उपासना साहू, शिवकुमार मोवार, ओमप्रकाश साहू गुरुजी, बहुरलाल कश्यप, कमलेश कश्यप, शिवकुमार साहू, श्रीमती कमलादेवी साहू, संतराम कश्यप, रघुवर प्रसाद पटेल, चूड़ामणि सिदार, चंद्रकांत गौर, श्रीमती सुनयना गौर, आचार्य दिनेश भारती गोस्वामी, दामोदर चौधरी, श्रीमती अनिता चौधरी, कुमारी शांति मरकाम, कुमारी धनेश्वरी राजवाड़े, पदमलोचन श्रीवास, श्रीमती माया श्रीवास, वेदप्रकाश थवाईत, श्रीमती तेजस्विनी थवाईत, जोगेंद्र सिदार, श्रीमती सुधा सिदार, देवाशीष सिदार, डॉ. (श्रीमती) कुमुदिनी भोई, हरेंद्रनाथ चौधरी, अमृतलाल पटेल, जी.पी. साहू, बी.एल. साहू, मनोज कुमार निर्मलकर, श्रीमती ममता निर्मलकर, दिकपाल साहू, श्रीमती दीपक साहू, योगेश पाण्डेय, श्रीमती नरबदिया केंवट, श्रीमती मीना साहू, श्रीमती परमेश्वरी कश्यप, श्रीमती सरिता साहू, श्रीमती देवकी साहू, श्रीमती हेमलता साहू, श्रीमती शांति साहू, बहादुर कश्यप, श्रीमती हेमबाई साहू, श्रीमती उषा साहू, फिरतराम साहू, डॉ. (श्रीमती) इंदु सक्सेना, आशुतोष कुमार यादव, विजय पटेल, श्रीमती रीना सहाय, श्रीमती राजेश्वरी कंवर, समेलाल मोवार, रामकृष्ण साहू, कुमारी वेदांशी साहू एवं श्रीमती प्रभा देवी सहित अन्य मानस प्रेमी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन ने श्रीरामचरितमानस के आदर्शों के माध्यम से प्रेम, मर्यादा, सेवा, संस्कार और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
उक्त आयोजन को सफल बनाने में ग्राम सोनादुला, सांकर, चांगोरी, अमलीपाली, सोनडीह एवं किरारी आदि ग्राम वासियों का योगदान सराहनी रहा।