, बिलासपुर निवासी मुकेश कुमार शर्मा, जिला जॉजगीर-चांपा में आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ है।
आबकारी उपनिरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) के पद पर आयोजित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में उन्हे सर्विस रिकार्ड (एसीआर) के 15 अंक कम देकर परीक्षा में अनुत्तीर्ण किए जाने से क्षुब्ध होकर मुकेश कुमार शर्मा द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर करने पर हाईकोर्ट, बिलासपुर द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित कई न्यायदृष्टांतो का हवाला देकर इस आधार पर कि पूर्व के तीन वर्षों वर्ष-2017, 2018, 2019 के सर्विस रिकार्ड (एसीआर) में प्रतिकूल टिप्पणी अंकित करने से पूर्व कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर न दिए जाने के आधार पर उच्च न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित न्यायदृष्टांतो के आधार पर 90 (नब्बे) दिवस के भीतर अन्य एसीआर के आधार पर याचिकाकर्ता के मामले को रिकंसीडर करने का आदेश पारित किया गया था. परंतु हाईकोर्ट द्वारा निर्णय पारित किए जाने के 09 (नौ) माह पश्चात् भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन न किए जाने से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष पुनः अवमानना याचिका दायर की गई। उक्त अवमानना याचिका में अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि माह दिसम्बर 2025 में उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर 90 दिवस के भीतर याचिकाकर्ता के मामले को रिकंसीडर करने का आदेश पारित किया गया था परंतु अवमाननाकर्ता पी.एस. एल्मा, आबकारी कमिश्नर एवं पी.एल. साहू अपर आबकारी आयुक्त द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की गंभीर अवमानना करते हुए 09 (नौ) माह पश्चात् भी उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नही किया गया है, चूँकि उच्च न्यायालय का 01-01 मिनट का समय अत्यंत कीमती एवं महत्वपूर्ण होता है. हाईकोर्ट के आदेश का लगातार पालन न किए जाने से अवमानना याचिकाओ की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, उक्त अवमानना याचिकाओ की सुनवाई से हाईकोर्ट का अत्यंत कीमती एवं महत्वपूर्ण समय व्यर्थ होता है जिससे अन्य महत्वपूर्ण मामलो की सुनवाई में विलंब से अन्य मामलो के पक्षकार न्याय से वंचित रह जाते है, उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा उक्त अवमानना याचिका की सुनवाई के पश्चात् मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एवं कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए अवमाननाकर्ता पी.एस.एल्मा, आबकारी कमिश्नर एवं पी.एल. साहू अपर आबकारी आयुक्त, रायपुर को यह नोटिस जारी किया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश की गंभीर अवहेलना करने पर क्यों ना आप दोनो अधिकारियों के विरूद्ध न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971 के तहत् कार्यवाही प्रारंभ की जावे।