बिलासपुर, मोदी के नाम पर जितने वाले मंत्रीयो को घमंड आ गया है उनको लग रहा जनता ने उनको जिताया है, जनता उनको पसंद करती है जबकि वास्तविकता ये है कि बिना मंत्री के इनके पास सौ कार्यकर्ता नहीं है , खाद, परिवहन, शिक्षा और राजस्व में कार्यकर्ताओं और आम लोगों की शिकायत ज्यादा है , ट्रांसफर पोस्टिंग के नाम पर महंगी मिठाई बिनाकाम नहीं हो रहा, एडवांस में लेनदेन हो गया है, मोदी जनता की सेवा की बात करते है लेकिन राज्य के मंत्री उनके नाम की काबिलियत को खुद का मान रही है जनता ने मोदी के नाम पर वोट दिया न कि इनके चेहरे पर, एक मंत्री के पिताजी तय करते किसका ट्रांसफर होगा किसका नहीं लेकिन फोकट में नहीं , पार्टी फंड कै नाम पर टेबल पर सीधे लेन देन होने की चर्चा है इसमें कार्यकर्ता आम आदमी और विभागीय सब जानते है , मंत्रियों के माध्यम से एक दूसरे के मंत्रालय में किसी की नहीं चली , जिसने सीधे मंत्री के दरवाजे मिठाई के साथ संपर्क किया उसको प्रसाद मिल गया। जो मनमुताबिक मिठाई लेकर नहीं गया उसको निराश लौटना पड़ा, इनके यंहा पिए ही मिठाई के हिसाब से ट्रांसफर पोस्टिंग तय कर रहे है , सीनियरिटी के बाद भी कइयों को मिठाई नहीं मिलने के कारण उनकी कुर्सी नहीं मिल रही है, इनकी कार्यशैली से असंतोष पनप रहा है , ये पीएम मोदी की छवि पर असर डाल रहे है , प्रधानमंत्री सेवा को मुख्य मानते और यहां के मंत्री मेवा को मुख्य मन रहे है। कार्यकर्ताओं की पीड़ा कार्यकर्ता बताते है फिर पार्टी के काम में लग जाते है एक बहुत बड़े पुराने नेता जो लगातार बढ़े नेता रहे वहां भी महंगी मिठाई की मांग की चर्चा कार्यकर्ता कर रहे है।