गजब शहर है ,अपने अपने तरीके से नेता, एक दूसरे को ठीक करते है, सुशांत कोतवाली बवाल में शांति अपील के लिए गए उसके बाद , अलग नगर निगम के लिए धरना प्रदर्शन हो गया शुरू।
गजब शहर है ,अपने अपने तरीके से नेता, एक दूसरे को ठीक करते है, सुशांत कोतवाली बवाल में शांति अपील के लिए गए उसके बाद , अलग नगर निगम के लिए धरना प्रदर्शन हो गया शुरू।
बिलासपुर, विधायक सुशांत शुक्ला कोतवाली में हुए बवाल में शांति अपील के कलेक्टर एसपी के कहने पर आधी रात कोतवाली पहुंचे शांति की अपील की , अब मामला उल्टा पड़ गया, इसी को कहते होम करते हाथ जलना, शहर में किसका किसे कनेक्शन है समझना मुश्किल है, सुशांत शुक्ला को क्या पता कि शहर के ब हंगामे में शांति अपील के लिए जाना भारी पड़ेगा, और अरपा पार नगर निगम का मोर्चा उनके के खिलाफ खुल जाएगा, अगर अलग नगर निगम का मोर्चा खोलना ही था था तो कोतवाली बवाल के पहले खोल लेते लेकिन सुशांत के जाने बाद इधर मोर्चा खोलना नई राजनीतिक दखलंदाजी कर मामला, अब मोर्चा खुल गया है तो क्रिया की प्रतिक्रिया तो होगी ही, राजनीति हुई है तो अब बवाल भी बढ़ेगा ही, अरपा पार नायर नगर निगम के धरने राजनीतिक नुकसान उठाना तो पड़ेगा। नई फसल और पुरानी फसल की लड़ाई दोनों पार्टी में चल रही है। पुराने नेता नई राजनीतिक पौध को फूटे आंखी बर्दाश्त नहीं कर रहे सब एक दूसरे के खिलाफ सुपारी दे रहे है।