हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एसडीएम ने साइंस कॉलेज में मेले को दी अनुमति, मामला कोर्ट ऑफ कंटेंप्ट का,कालेज की अनुमति के बिना मेला आयोजन।

 

 बिलासपुर में कोई भी बाहर से आकर अपनी मर्जी से काम कर सकता उसके किसी सरकारी नियम कायदे का पालन जरूरी नहीं है ,और अधिकारी भी ऐसे किसी बाहरी व्यक्ति को रोक जो मनमानी कर रहा है उसे रोक नहीं पर रहा है , क्या अधिकारी हाईकोर्ट से बड़े है या हाईकोर्ट के आदेश का उनके लिए कोई अहमियत नहीं है, कालेज ने अनुमति नहीं दी बिना अनुमति आखिर कैसे मेला लगा गया, मामला अपराधिक श्रेणी का बनता है , एसडीएम ने हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना की है गरीब आदमी के लिए कानून बड़े आदमी के लिए हाईकोर्ट का आदेश भी अधिकारी दरकिनार कर काम कर रहे है।

उच्च न्यायालय के प्रकरण क्र. WPC- 3596/2026 में पारित आदेश. (2) प्राचार्य शा. विज्ञान महावि. का पत्र क्रमांक 29/स्था./2026 दिनांक 7.4.26

-0-बिलासपुर जिले में स्थित शासकीय विज्ञान महाविद्यालय जिले का एक मात्र पूर्णतः विज्ञान संकाय का आदर्श महाविद्यालय है। यहाँ जिले भर के विज्ञान संकाय से स्नातक एवं स्नातकोतर करने वाले विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने को प्रवेश लेते है तथा अध्ययन करते है । महाविद्यालय में बड़ा खेल मैदान है, शासन एवं महाविद्यालय प्रशासन का दायित्व है कि विधार्थियों को खेलने कि सुविधा प्रदान कि जाये, महाविद्यालय के खेल मैदान में दो वर्ष पूर्व राज्य स्तरीय खोखों (महिला) प्रतियोगिता का आयोजन एवं अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयीन सर्किल कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था, जिसमें मैदान को प्रतियोगिता के अनुरूप बनाया गया था, किन्तु इसके पश्चात् महाविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न मेला आयोजनों के लिए मैदान को किराये पर महीनों महीनों तक के लिए दे दिया गया जिस से खेल मैदान खेलने हेतु उपयुक्त नहीं रह गया, इस प्रकार खेल मैदान की अनुपलब्धता एवं अनुपयुक्त हो चुकने के कारण महाविद्यालय के खिलाडीयों की खेलों के प्रति रुचि निरंतर कम हों रही हैं इस परिप्रेक्ष्य में महाविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया है खेल मैदान को खेल विधा अनुरूप विकसित कर महाविद्यालयीन खिलाडियों को खेलने हेतु पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्य रूप से महाविद्यालय के खिलाडी विद्यार्थियों के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए महाविद्यालय प्रशासन एवं खेलकूद मैदान समिति ने स्पष्ट निर्णय लिया है कि मैदान किसी भी व्यवसायिक गतिविधियों के लिए ना दिया जाये।

वर्तमान में महाविद्यालय मैदान में बिना अनुमति के मेला लगाया गया है जिसमे प्रमुख तथ्य निम्नानुसार है

फन फेयर एम्यूजमेंट पार्क का आवेदन महाविद्यालय में 21/5/26 को प्राप्त हुआ । इस समय महाविद्यालय में प्राचार्य के रूप में डॉ. डी. पी. साहू पस्थ्य थे। उनके द्वारा इस प्रकरण पर कोई कार्यवाही नहीं किया गया किन्तु प्राचार्य साहू के अल्प अवधि अवकाश में जाने पर दो दिन के प्रभारी प्राचार्य डॉ. डी. के श्रीवास्तव ने मो. अमजद को NOC दिनांक 20/6/26 को जारी किया। यह कार्यवाही संदिग्ध एवं नियमों के विरुद्ध है जिस कार्य को नियमित प्राचार्य ने एक माह तक नहीं किया उसको दो दिन के प्राचार्य ने क्यों किया, इस घटना क्रम में बड़ी आर्थिक साठगांठ स्पष्ट प्रतीत हो रही है।

प्राचार्य द्वारा जारी पत्र कि कंडिका 2 में स्पष्ट है कि जिला प्रशासन से कार्यक्रम कि अनुमति प्राप्त होने पर ही खेल मैदान अंतिम रूप से प्रदान किया जायेगा। जो आज तिथि तक महाविद्यालय से अनुमति नहीं दी गई है। जमीन का मालिक उच्च शिक्षा विभाग है जो कि कलेक्टर के सीधे अधिका क्षेत्र में नहीं आता है।

20/6/26 के पत्र के आधार पर मेला के मालिक ने 24/6/26 को पुलिस विभाग से तथा 8/7/2 को नगर निगम से अनापति पत्र प्राप्त किया ।

चर्च के छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ लॉच उच्च न्यायालय में एपिसोड डब्ल्यूपीसी-3596 दर्ज किया, अध्ययन करते हुए न्यायिकाधिपति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद

ने 13/8/26 को आदेश पारित किया जिसमे उन्होंने कहा कि “Having heard learned

पक्षकारों के अधिवक्ताओं से परामर्श करने और उनके द्वारा प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद, यह निष्कर्ष निकलता है कि

 SDM ने 14/7/26 को मेला लगाने हेतु अनापति पत्र जारी किया जिसमे उन्होंने समय 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक दिया है जोकि सीधा सीधा  उच्च न्यायालय के आदेश का अवहेलना है।

प्रकरण में छात्रो के आपति पर कलेक्टर महोदय ने 5/8/26 को सुनवाई रखी थी जिसे उन्होंने 19/8/26 को पुनः राखी है अर्थात अभी प्रकरण कलेक्टर महोदय के यहाँ विचाराधीन है उसके बौजुद बिना अनुमति के मेला प्रारंभ किया जाना मेला आयोजको द्वारा माननीय न्यायालय एवं कलेक्टर महोदय का अनादर प्रतीत होता है।

प्राचार्य द्वारा आज तक मैदान कि अनुमति नहीं दी गई है तथा प्राचार्य द्वारा मेला आयोजक को 22/7/26 को नोटिस दिया कि आगामी आदेश तक कोई भी खेल मैदान में आयोजन सम्बन्धी गतिविधि न करे अन्यथा महाविद्यालय द्वारा किये जाने वाले अनुशासनात्मक कार्यवाही के उतरदायी आप होंगे.

प्राचार्य द्वारा मेला आयोजक को पुन: 30/7/26 को नोटिस दिया कि बिना अनुमति तथा कलेक्टर महोदय के यहाँ लंबित प्रकरण कि स्थिति में आपको मैदान मेला आयोजन के लिए दिया जाना असम्भव है अंतः आप अपने टेंट पंडाल को यहाँ से तत्काल हटाये |

मो. सईम द्वारा पूर्व में किये गए आयोजन में महाविद्यालय को नौ लाख कम दिए गए थे जिसकी जाँच जनभागीदारी समिति अध्यक्ष द्वारा दिनांक 13/7/26 को जनभागीदारी समिति के सदस्यों द्वारा कराईं जा रही है, इसी प्रकार कलेक्टर  द्वारा भी इसी आयोजन कि जाँच के लिए अतिरिक्त संचालक को दिनांक 2/7/26 को पत्र लिख कर जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है ।

हाईकोट का आदेश।

दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने और पेश किए गए तर्कों पर विचार करने के बाद, यह कोर्ट पाती है कि संबंधित कलेक्टर द्वारा 08.05.2026 के आदेश के जरिए दी गई अनुमति केवल एक निश्चित समय के लिए ही मान्य थी, जो अब खत्म हो चुकी है। इसके बाद, प्रिंसिपल ने 20.06.2026 को एक ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी किया, जो स्पष्ट रूप से संबंधित कलेक्टर द्वारा सीमित समय के लिए दी जाने वाली अनुमति पर निर्भर है, और वह भी कॉलेज के समय के बाद, यानी शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक। पे स्थिति में, अगर याचिकाकर्ता अनुमति दिए जाने के किसी भी प्रस्ताव से असंतुष्ट हैं, तो संबंधित कलेक्टर के सामने अपनी आपत्तियां उठा सकते हैं। ऐसी आपत्तियां मिलने पर, संबंधित कलेक्टर कानून के अनुसार उन पर विचार करेंगे और फैसला लेंगे।)

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