कमजोर शिक्षामंत्री नहीं सम्भल रहा विभाग, न डीईओ,न संलग्नीकरण वाले शिक्षक मूल स्थान में गए, शासन का आदेश कोई मान नहीं रहा , जबकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
कमजोर शिक्षामंत्री नहीं सम्भल रहा विभाग, न डीईओ,न संलग्नीकरण वाले शिक्षक मूल स्थान में गए, शासन का आदेश कोई मान नहीं रहा , जबकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
बिलासपुर का शिक्षा विभाग इन दिनों गंभीर प्रशासनिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पिछले पांच दिनों से जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) का पद रिक्त है, जिसके कारण जिले की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णय और विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षा जगत में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि प्रदेश के प्रमुख जिलों में शामिल बिलासपुर को अब तक नियमित जिला शिक्षा अधिकारी क्यों नहीं मिल पाया है।
चार वर्षों में चार डीईओ, स्थिर नेतृत्व का अभाव
लगातार बदलते नेतृत्व ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले चार वर्षों में चार अलग-अलग जिला शिक्षा अधिकारी निपटे ।
टी.आर. साहू – भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद पद से हटाए गए।
तिवारी – युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) प्रक्रिया के दौरान स्थानांतरित कर दिए गए।
तांडे – भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच विवादों में घिरे और पद से हटाए गए।
रामेश्वर – अल्पकालिक नियुक्ति रही, एक माह का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सके।
अब स्थिति यह है कि डीईओ का पद रिक्त होने से विभाग एक बार फिर नेतृत्वहीन नजर आ रहा है।
अतिरिक्त प्रभार भी सवालों के घेरे में
स्थिति को और जटिल बनाते हुए संयुक्त संचालक शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार ऐसे अधिकारी को सौंपा गया है, जिनकी मूल पदस्थापना लगभग 300 किलोमीटर दूर सरगुजा में है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि दूरस्थ जिले में पदस्थ अधिकारी बिलासपुर की दैनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी प्रभावी ढंग से कैसे कर पाएंगे।
सलंग्नीकरण समाप्ति के आदेश, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
प्रदेश सरकार द्वारा सलंग्नीकरण समाप्त करने के पांच अलग-अलग आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन बिलासपुर जिले में स्थिति अलग दिखाई देती है।
कलेक्टर के निर्वाचन कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तथा अन्य कार्यालयों में कई शिक्षक एवं कर्मचारी प्रतिनियुक्ति अथवा संबद्ध व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं।
हाल ही में पीजीबीटी शिक्षक प्रशिक्षण के लिए जारी प्रतिनियुक्ति आदेशों के बाद व्याख्याताओं को मूल संस्था में वापस भेजा गया। इसके विपरीत, बालक सरकंडा स्कूल के व्याख्याता बसंत प्रताप सिंह को मंत्री के ओएसडी की अनुशंसा पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिलासपुर में सहायक संचालक के रूप में प्रतिनियुक्ति दिए जाने की चर्चा विभाग में बनी हुई है।
इससे दिख रहा है विभागीय आदेशों के क्रियान्वयन में एकरूपता का अभाव है और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय बदलते रहते हैं।