किसानों की मांगों को लेकर जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के नेतृत में कलेक्टर का घेराव, महेंद्र ने दिखाया संगठन का दम।

किसान आंदोलन से गूंजा बिलासपुर: कांग्रेस ने बैलगाड़ी और पदयात्रा के साथ किया कलेक्ट्रेट का ऐतिहासिक घेराव

“खाद-बीज की किल्लत और प्रशासनिक कुप्रबंधन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ९-सूत्रीय मांग पत्र”

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।

छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों को आ रही तीव्र व्यावहारिक दिक्कतों, सरकारी नियंत्रण और प्रशासनिक कुप्रबंधन के विरोध में आज बिलासपुर में आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर (ग्रामीण) एवं जिला किसान कांग्रेस कमेटी (शहर/ग्रामीण) के संयुक्त तत्वावधान में आज ‘छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन’ के तहत कलेक्ट्रेट का ऐतिहासिक घेराव किया गया और माननीय मुख्यमंत्री महोदय के नाम जिला कलेक्टर को 9-सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया।

 सुबह 11:00 बजे जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक रणनीतिक बैठक के बाद, तमाम दिग्गज नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में विशाल रैली निकाली गई। यह आंदोलन उस समय बेहद ऐतिहासिक और अनोखा हो गया जब कांग्रेस नेता, पदाधिकारी और क्षेत्र के पीड़ित किसान पारंपरिक अंदाज में बैलगाड़ियों पर सवार होकर और विशाल पदयात्रा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आंदोलनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया।

बिलासपुर जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष, महेंद्र गंगोत्री ने कहा :”प्रदेश की वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। खरीफ सीजन सिर पर है, लेकिन सोसायटियों से खाद और बीज गायब हैं। प्रति एकड़ एक बोरी खाद का नियम बनाकर सरकार ने किसानों की पीठ पर छुरा घोंपा है। किसान कांग्रेस और जिला कांग्रेस इस तानाशाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर सोसायटियों में खाद की कमी दूर नहीं हुई और टोकन व्यवस्था नहीं सुधरी, तो यह आंदोलन विधानसभा तक गूंजेगा।”

कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा -आज मैदानी स्थिति अत्यंत दयनीय है। हमारा अन्नदाता सुबह घर से एक उम्मीद लेकर सोसायटियों और बाजारों की तरफ निकलता है, लेकिन शाम तक उसके हाथ में सिर्फ लंबी लाइनें, धक्के, प्रशासनिक बहाने और भारी मजबूरी ही लगती है। मंत्रियों का स्वागत करने, बड़े-बड़े राजनैतिक भाषण देने और फोटो खिंचवाने की राजनीति से परे अब सरकार को धरातल पर उतरना होगा क्योंकि केवल स्वागत-सत्कार से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। जब भाषण देना होता है तो बड़े वादे किए जाते हैं, पर जब जमीनी स्तर पर किसान खाद, बीज और डीजल के लिए रोता है, तब पूरी प्रशासनिक व्यवस्था मौन हो जाती है।”

मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने आरोप लगाया कि “ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर ट्रैक्टर लाने की अनिवार्यता और जरकिन (कैन) में डीजल देने पर लगी पाबंदी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। भीषण गर्मी में खेती का काम छोड़कर किसान पेट्रोल पंपों पर लाइन लगाएं या खेतों में काम करें? ऊपर से अघोषित बिजली कटौती ने सिंचाई व्यवस्था ठप कर दी है। सरकार तुरंत जरकिन में डीजल की आपूर्ति बहाल करे और बिजली कटौती पर रोक लगाए, अन्यथा किसान भाई चुप नहीं बैठेंगे।”

मुख्य बिंदु: छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन की 9-सूत्रीय मांगें

प्रति एकड़ खाद की कटौती का तुगलकी फरमान तुरंत वापस हो: खरीफ सीजन के लिए प्रति एकड़ मात्र ‘1 बोरी खाद’ की पात्रता का नियम पूरी तरह से अव्यावहारिक है। इसे निरस्त कर वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त खाद दी जाए।

‘तीन बार में खाद’ देने की अव्यावहारिक नीति बंद हो: ५ एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन किश्तों में खाद देने का नियम बंद कर छोटे-बड़े सभी किसानों को एकमुश्त खाद मिले और ‘सुपर फ्लॉप’ टोकन व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए।

‘जितनी आवश्यकता, उतना खाद-बीज’ का अधिकार: खाद की मात्रा का सही आकलन केवल किसान ही कर सकता है, न कि सरकार। अतः सोसायटियों से खाद-बीज उठाने पर लगाया गया प्रशासनिक नियंत्रण तत्काल हटाया जाए।

‘जरकिन’ (कैन) में डीजल देने पर लगी पाबंदी हटे: ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों में किसानों के लिए डीजल हेतु भारी-भरकम ट्रैक्टर को स्वयं लाना अनिवार्य करना और मात्र ₹1,000 का डीजल देना सरासर अन्याय है। किसानों को पूर्व की भांति जरकिन में डीजल की सुलभ आपूर्ति की अनुमति दी जाए।

कृषि बिजली की बढ़ती दरें वापस हों, अघोषित कटौती बंद हो: ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों होने वाली अघोषित बिजली कटौती से सिंचाई व्यवस्था ठप हो चुकी है। कृषि पंपों के लिए बिजली को पूर्णतः मुफ्त किया जाए।

खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगे: खाद के कृत्रिम संकट का लाभ उठाकर खुले बाजार में हो रही जमाखोरी पर रोक लगाई जाए, निजी दुकानदारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और पूरे प्रदेश में खाद की एक समान पारदर्शी दर (Uniform Rate) लागू हो।

कृषि ऋण (KCC) सीमा बढ़ाकर ₹40,000 प्रति एकड़ हो: सहकारी सोसायटियों द्वारा मिलने वाले कृषि ऋण की व्यवस्था (70% नकद और 30% खाद) को सरल बनाकर ऋण सीमा को ₹40,000 प्रति एकड़ सुनिश्चित किया जाए।

धान / कृषि उपज की एकमुश्त राशि का भुगतान हो: प्रदेश के किसानों को ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से बोनस राशि सहित, पिछले 3 वर्षों की एमएसपी (MSP) की अंतर राशि को जोड़कर, इस वर्ष का पूरा पैसा एकमुश्त (एक साथ) दिया जाए।

लंबित अनुदान का त्वरित भुगतान: उद्यानिकी, कृषि और पशुपालन विभाग की योजनाओं में पारदर्शिता लाने हेतु लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाए और वर्ष 2025-26 के किसानों की लंबित सब्सिडी राशि तत्काल जारी की जाए।

उग्र आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी

घेराव प्रदर्शन के अंत में नेताओं ने जिला प्रशासन को सचेत करते हुए कहा कि यदि प्रदेश शासन ने इन 9-सूत्रीय मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक और त्वरित निर्णय नहीं लिया, तो आज का यह कलेक्ट्रेट घेराव केवल एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में संगठन प्रदेश के लाखों किसानों के हक के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र चक्काजाम और जेल भरो आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

आंदोलन में उपस्थित वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण:

प्रमुख जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ नेतृत्व:

  महेंद्र गंगोत्री (जिला अध्यक्ष, बिलासपुर ग्रामीण), विधायक अटल श्रीवास्तव  दिलीप लहरिया,  विजय केसरवानी,  राजेंद्र शुक्ला,  रामशरण यादव (पूर्व महापौर),  प्रमोद नायक और आत्मजीत मक्कड़।

संगठन एवं किसान कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्तागण:

अकील हुसैन (प्रभारी महामंत्री – संगठन), विनय शुक्ला (प्रदेश उपाध्यक्ष), संतोष बघेल (ग्रामीण जिला अध्यक्ष), योगेश यादव (शहर अध्यक्ष), नीरज सोनी (प्रदेश महामंत्री), इन्द्रजीत कुर्रे, आशीष सिंह, अरुण त्रिवेदी, सुभाष अग्रवाल, अश्वनी उद्देश्य, गीतांजलि कौशिक, लक्ष्मीनाथ साहू, अभ्युदय तिवारी, अमित साहू, शैलेन्द्र निर्मलकर, शाहनवाज खान, बिहारी देवांगन, अभय कौशिक, रियाज खान, पुष्पकांत कश्यप, राकेश यादव, रियाज खोखर, शहजादा खान, सत्या सर्वे, संजू पाल, शेखर जायसवाल, अमृत लाल, रवि कुमार, जगन्नाथ यादव, मदन कहरा, किशन पटेल, रूपेश कश्यप, शीतल दास मानिकपुरी, राजा रावत, रवि रावत, शेर सिंह कश्यप, टी आर लहरें, संजय जायसवाल, मुद्रिका प्रसाद कौशिक।

भोला राम साहू, बंटी बैसवाड़े, शिव बालक कौशिक, जितेंद्र पांडेय, आदित्य दीक्षित, भरत खांडे, शीतल मानिकपुरी, लक्की यादव, अमित यादव, राजू सूर्यवंशी, साखन द्रवे, प्रीति पाटनवार, सीमा पांडेय, रंजीत सिंह, भावेंद्र गंगोत्री, अर्पित केशरवानी, पवन साहु, जितेंद्र राज, अजय ध्रुव, प्रताप जायसवाल, सुरेश ठाकुर, उमेश केवट, विजय यादव, दीपक बघेल, राजू यादव, लोकेश श्रीवास, दौलत साहू, पारस राम चंद्राकार, शत्रुघ्न चन्द्राकार, मुन्ना श्रीवास, चित्रेखा, शिरीष कश्यप, राजकुमार कश्यप, रामेश्वर धीवर, शेरू खान, अमृत जायसवाल, वेद रात्रे, नानक राम रेलवानी, अमित श्रीवास, महेश ठाकुर, ओम प्रकाश निर्मलकार, दिनेश देवांगन, मो. अजमत हुसैन, आवेश जान, अमित सिंगरौल, प्रवेश पटवा, ब्रह्मदेव सिंह ठाकुर, सुमित सूर्यवंशी, प्रीतम सूर्यवंशी, क्रांति सक्सेना, राकेश डोंगरे, किशोर विजय, संदीप विजय, मुकेश खरे, कमलेश केशकर, शिव प्रसाद, रितेश सूर्यवंशी, अरविंद सूर्यवंशी, विकास सूर्यवंशी, लक्की सूर्यवंशी, मोनू सूर्यवंशी, विकास लास्कर, अनिल सत्यार्थी, दीपक भूमे, गुलशन डोंगरे, उत्तम कोसरे, आकाश खांडे, सुभाष बर्मन, धनंजय सूर्या, कैलाश सूर्या।

उपरोक्त वरिष्ठ नेताओं सहित सभी ब्लॉक अध्यक्ष, अनुमंडल अध्यक्ष एवं हजारों की संख्या में क्षेत्र के जागरूक किसान भाई उपस्थित रहे।

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