
बिलासपुर, दीपक बैज की कुर्सी खतरे में है ,बदलने बदलने की खबर से बैज विचलीत है , राजनीतिक हलकों में ऐसी चर्चा है कि बाबा से बैज खुद को असुरक्षित समझ रहे है, महंत ने दोनों को एक करने की कोशिश की है लेकिन राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता, लेकिन राजनीति तो होते रहती है कोई धीरे से करता है कोई जोर से कोई ढुलमुल तरीके से करता है कुछ पीछे चल के नेता बन जाते है कुछ बिना चले भी समीकरण में और भोंकवा बन कर नेता बन जाते है , दीपक बैज का कार्यकाल पूरा होने वाला है ऐसे में कइयों की नजर पी सीसी की कुर्सी पर है ,, पुराने नेताओं का पेट अभी भरा नहीं है , बैज घबरा रहे है , कंही विदाई न होजाये टीके रहने की कोशिश बैज की जारी है , अब बैज को भूपेश बघेल ही हनुमान नजर आ रहे है , बैज कष्ट हरो प्रभु की अभिलाषा से भूपेश की ओर निहार रहे , अब तो आप ही तारण हार हो, जैसे फूलों की विपदा हरि वैसे मेरे भी हर लो, लेकिन प्रभु तो समर्पण चाहते है बात करके फिर दूसरे के साथ खाना खाने बैठ जाना समर्पण नहीं है , अब तो जाहिं विधि राखे राम ताहि विधि रहिये की भावना से बैज को समर्पण दिखाना होगा वरन, जय छत्तीसगढ़ हो जाएगा,, महत्वकांक्षा सब की है महंत हमेशा मध्यम्मार्गी रहे है , बाबा तो बाबा है राहुल गांधी तक को दम कर दिए कि आप बोले थे आप बोले थे, जबकि महंत शांत स्वभाव के है गरमदल के नहीं है , भूपेश बघेल जुझारू है सीएम और महासचिव का सफ़र जुझारूपन बताता है, रिस्क लेकर काम कारण भूपेश को आता है जनता ने पसंद किया 35सीट आ गई थीटिकट बटवारे में कुछ गड़बड़ नहीं होती तो बेड़ा पार था,, माहौल फिर गरमा रहा है, बैज को भी समझ आ रहा है कि कौन उनका मददगार हो ।सकता लेकिन बुद्धि काम करेगी तभी बैज बच पाएंगे वरना जय हिंद।
