आपराधिक मामला और विभागीय जांच नहीं चल सकते, हाईकोर्ट

बिलासपुर-जांजगीर – चाम्पा में आरक्षक के पद पर पदस्थ है । उसके विरूद्ध पुलिस थाना – जांजगीर में भादवि की धारा 506 , 509 ( बी ) एवं आई.टी.एक्ट के तहत् अपराध पंजीबद्ध कर उसे सेवा से निलंबित कर दिया गया । दिनांक 05.03 . 2021 को पुलिस अधीक्षक ( एसपी ) जांजगीर – चाम्पा द्वारा इन्हीं समान आरोपों पर नारद ताम्रकार के विरूद्ध आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई । उक्त कार्यवाही से क्षुब्ध होकर कॉन्सटेबल नारद ताम्रकार द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं दीपिका सन्नाट के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई । अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं दीपिका सन्नाट द्वारा हाईकोर्ट के – समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि चुंकि याचिकाकर्ता के विरूद्ध आपराधिक मामला एवं विभागीय जांच दोनों में अभियोजन साक्षी समान है एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य विरूद्ध नीलम नाग एवं अन्य इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा डिवीजनल कलेक्टर , कर्नाटका स्टेट रोड ट्रान्सपोर्ट कार्पोरेशन विरूद्ध एम.जी. विठ्ठल राव के प्रकरण में पारित न्यायिक दृष्टांत के आधार पर यदि आपराधिक मामले एवं विभागीय जांच में अभियोजन गवाह एक हैं तो पहले समस्त अभियोजन साक्षियों का कथन क्रिमीनल केस में लिया जाना अनिवार्य है अन्यथा सम्पूर्ण कार्यवाही दूषित हो जाएगी । चुंकि याचिकाकर्ता नारद ताम्रकार के मामले में क्रिमीनल केस में अभियोजन साक्षियों का परीक्षण नहीं किया गया है इस आधार पर हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा उक्त मामले की सुनवाई के पश्चात् याचिकाकर्ता के विरूद्ध संचालित विभागीय जांच कार्यवाही पर स्थगन ( स्टे ) करते हुए पुलिस अधीक्षक ( एसपी ) जांजगीर – चाम्पा , पारूल माथुर को यह निर्देशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता के विरुद्ध किसी प्रकार की विभागीय कार्यवाही ना करें

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