बिलासपुर, टेंडर मामले में सरकार पर जुर्माना लग गया सरकार ठेकदार को एक लाख देगी सरकारी खजाने से सरकार को एक तरह से नुकसान हुआ और जुर्माना लगाना भी सामान्य बात नहीं है , जल संसाधन विभाग के एक ठेकदार को दो बार कम बोली के बाद भी उसका टेंडर निरस्त कर दिया गया, जस्टिस रमेश सिन्हा और अरविंद कुमार अग्रवाल की बेंच ने बिना किसी कारण कम बोली के बावजूद ठेकेदार का टेंडर निरस्त कर दिया गया वो भी दो बार हाईकोर्ट ने इसे भेदभाव पूर्ण माना है। अधिकारियों ने ट्रेडर को पर कोई आपत्ति नहीं की लेकिन मूल्यांकन समिति ने दो बार टेंडर निरस्त कर दिया, सरकार की ओर से मजबूत पैरवी नहीं होने की वजह से हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाया, सरकारने कोर्ड को 18%डर को अधिक बताया और जनहित में निरस्त करने की बात कही डीबी ने इसे मनमानी मानते हुए कहा कि सरकार के पास किसी भी टेंडर को निरस्त करने का अधिकार है लेकिन असीमित अधिकार नहीं है हाईकोर्ट ने नोट किया कि टेंडर निरस्त करने सरकार की ओर से कोई ठोस तुलनात्मक डेटा पेश नहीं किया,की 18%की दर ज्यादा है है फैसले में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को एक अनुचित और मनमानी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा । मामला जल संसाधन बिलासपुर संभाग का है।
