ब्रेकिंग,केबिनेट के यूनिफाइड सिविल कोड के फैसले का विरोध, सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के अध्यक्ष सुभाष परते ने जताया विरोध, कहा हमारी विशिष्ट पहचान खत्म करने की तैयारी, इसका होगा विरोध।

छत्तीसगढ़ शासन कैबिनेट मीटिंग। में आज प्रमुख फैसले के रूप में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का फैसला
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बिलासपुर,अब एक नई विवाद की जड़ यूनिफॉर्म सिविल कोड अगर हमारे प्रदेश छत्तीसगढ़ में लागू होगा तो इस कानून के मुताबिक प्रदेश के सभी समुदाय एक कानून नियम के तहत संचालित होंगे।
क्या है समान नागरिक संहिता कानून? (What is the Uniform Civil Code?)
समान नागरिक संहिता एक सामाजिक मामलों से संबंधित कानून होता है जो सभी पंथ के लोगों के लिये विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत व बच्चा गोद लेने आदि में समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में, अलग-अलग पंथों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही ‘समान नागरिक संहिता’ की मूल भावना है। यह किसी भी पंथ जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है।

जिसका पूर्व में भी सर्व आदिवासी समाज ने बहुत पुरजोर विरोध दर्ज कराया था। अब वर्तमान में राज्य शासन यहां लागू करने की तैयारी कर रही है। यहां के मूल निवासी आदिवासीयो की विशिष्ट पहचान एवं रूढ़ि जन्य परंपरा के तहत संचालित रीति रिवाज जो सदियों से संचालित हैं जिसे संविधान में विधि का बल भी प्रदान किया गया है । का क्या होगा पांचवी छठवीं अनुसूची एवं अनुच्छेद 13 (3 क) से संचालित आदिवासियों के पारंपरिक संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक स्पष्ट गाइडलाइन शासन को बनाकर आदिवासी समुदाय को विश्वास में लेना पड़ेगा, नहीं तो इस कानून का पूरे आदिवासी समाज की तरफ से विरोध झेलना पड़ेगा।।

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