
बिलासपुर, रोड एक्सीडेंट में रोज मौत हो रही है, रेत चोरों के कारण रोज मौत हो रही है, कोयला चोरों के कारण मौत हो रही है कोयला गाड़ी से टकरा कर स्कॉर्पियो सवार तीन लोगों की मौत हुईं थी, सेन्द्रीए तीन बहनों की रेत माफिया के कारण मौत हुईं थी, रेत माफिया ने गढ़वट् नाबालिग गरीब की भूख का फायदा उठाया और उसे मौत के मुंह में डाल दिया , बदले में न पेट भरा न कोई मुवायजा मिला जीवन अलग चला गया,सड़क दुर्घटना में ये तीनों का अहम रोल है लेकिन तमाम दावों के बीच इस लगाम लगाना नक्सलियों से जायद कठिन काम दिखता है, दर असल ये अघोषित संगठित अपराध है इसलिए इस पर लगाम नहीं लगती कोई नेता रेत चोरी का हल्ला तब करता है जब उसके आदमी की गाड़ी पकड़ा जाती है , पुलिस, खनिज , प्रशासन कार्यवाई करते है लेकिन माफिया पर असर नहीं पड़ रहा है , आज चोरी आदत बन गई है पेट भरने की मजबूरी नहीं है, चोरी करके राजनीति और अफसरों को खुश किया जा रहा चोर आज नेता मंत्री अधिकारी के बीच बड़े सहज और टशन के साथ बैठते है अधिकारी कुर्सी उपलब्ध कराते हैं , इन अधिकारियों को ये नहीं पता कि ये चोर चैम्बर से बाहर निकल कर आते है बताते है पहुंचाने गया था और बाकी खेल अपने आप फिर शुरू हो जाता है , ये तीन चोरी आम आदमी के जीवन को प्रभावित कर रहे है, उनकी जान जा रही है परिवार का कमाने वाला मुखिया जा रहा है कोई मजबूरी में चोरी करे तो समझ आता है लेकिन आदतन चोरों को पनाह देना ही इस अपराध का जड़ है। अमित कश्यप का पेट भी भरा रहता उसके पास भी काम होता तो , या सरकारी स्किल डेवलपमेंट का प्रशिक्षण प्राप्त होता , स्कूल जाता होता , और पिता शराब न पिता होता तो क्या अमित कश्यप रेत चोरी करने जाता?