
देशभक्ति, अनुशासन और प्रतिभा का अद्भुत संगम
आधारशिला विद्या मंदिर सैनिक स्कूल में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों में देशप्रेम, अनुशासन, कर्तव्यबोध और नैतिक मूल्यों को विकसित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास रहा। विद्यालय प्रांगण देशभक्ति के रंगों से सराबोर दिखाई दिया, जहाँ हर गतिविधि भारत माता के प्रति समर्पण की भावना को दर्शा रही थी।कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ, जिसके पश्चात राष्ट्रगान गाया गया।
संविधान के मूल्यों को आत्मसात कराने के उद्देश्य से विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती जी.आर. माधुलिका द्वारा सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संविधान की प्रस्तावना (प्रीएम्बल) की शपथ दिलवाई गई। इस शपथ के माध्यम से सभी ने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों पर चलने तथा देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया। यह क्षण सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और विद्यार्थियों में सच्चे नागरिक बनने की भावना को और अधिक मजबूत कर गया।
इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की।
कार्यक्रम की विशेषता विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और अनुशासनात्मक गतिविधियाँ रहीं। विद्यार्थियों ने पिरामिड गेम, डॉट गेम्स, परेड एवं सलामी, तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया कि देशभक्ति केवल भाषणों या नारों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह हमारे दैनिक आचरण, अनुशासन और व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।
किसान पर आधारित छत्तीसगढ़ी लोकगीत ने भारतीय कृषि संस्कृति और अन्नदाता के योगदान को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को यह याद दिलाया कि देश की असली ताकत उसके किसानों और ग्रामीण संस्कृति में निहित है। इसके साथ ही प्रस्तुत देशभक्ति नृत्य ने वीरता, एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को जीवंत कर दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मेजर डॉ. विक्रम रेड्डी चिन्थाकुंटा
(MBBS, MBA ,पूर्व आर्मी मेडिकल ऑफिसर , सीनियर मेडिकल ऑफिसर, SECL – इंदिरा विहार) रहे। उन्होंने अपने अत्यंत प्रेरणादायक संबोधन में विद्यार्थियों को भारतीय सेना, मेडिकल क्षेत्र और राष्ट्र सेवा के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में डॉक्टरों के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हैं और सेना एक ऐसा मंच है जहाँ व्यक्ति का समग्र व्यक्तित्व विकास होता है।उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेना में जाने से व्यक्ति की सोचने की क्षमता, संवाद कौशल, आत्मविश्वास और जीवन को देखने का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। सेना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और सेवा से जुड़ी जीवनशैली है। सेना में हर व्यक्ति को एक बटालियन रूपी परिवार मिलता है, जो जीवनभर साथ देता है।मेजर डॉ. रेड्डी ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि सेना के माध्यम से देश के उन दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों को देखने का अवसर मिलता है, जहाँ सामान्य नागरिक नहीं पहुँच पाते। उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर जैसे स्थानों का उदाहरण देते हुए यह समझाया कि सेना में रहते हुए व्यक्ति देश को भीतर से समझता है और उसकी वास्तविक सुंदरता को महसूस करता है।उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर अपार संभावनाएँ और विशेष प्रतिभा होती है। सही मार्गदर्शन, अनुशासन और मेहनत से वह प्रतिभा निखरकर सामने आती है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज की कक्षाओं और प्रशिक्षण क्षेत्रों में ही कल के राष्ट्रनिर्माता तैयार हो रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को डॉ. अजय श्रीवास्तव (चेयरमैन) द्वारा प्रेरणादायक संदेश दिया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाया कि सच्ची देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और अच्छे आचरण में दिखाई देती है। उन्होंने बच्चों को अपने छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के निदेशक श्री एस.के. जनास्वामी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान हमारे देश की आत्मा है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अनुशासन, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा को जीवन में अपनाने का संदेश दिया, जिससे बच्चों में देशभक्ति और जिम्मेदारी की भावना मजबूत हुई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत टीमवर्क, आत्मविश्वास और अनुशासन वास्तव में सराहनीय रहा। सभी प्रस्तुतियाँ यह दर्शाती थीं कि विद्यालय केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास पर भी समान रूप से ध्यान देता है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की ओर से मुख्य अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही यह आयोजन शिक्षकों के लिए भी एक प्रेरणादायक और सीखने वाला अनुभव रहा। विद्यार्थियों की जिज्ञासा, अनुशासन और सकारात्मक व्यवहार देखकर सभी शिक्षकगण गर्व महसूस कर रहे थे।समारोह का समापन देशभक्ति गीतों और गगनभेदी नारों
“जय हिंद, जय भारत”
के साथ हुआ।
