अमेरा खदान विरोध ,आदिवासियों से मारपीट के मामले में सर्व आदिवासी समाज ने दोषी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग, समाज ने दी प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी।

*अमेरा में एसईसीएल कोयला खदान विस्तार विरोध में ग्रामीणों के साथ हुई पुलिस मारपीट दमन का सर्व आदिवासी समाज ने किया विरोध होगा आंदोलन तेज*

सरगुजा संभाग
एसईसीएल की अमेरा कोयला खदान विस्तार परियोजना को लेकर परसोड़ी कलाँ क्षेत्र में आदिवासी के साथ अन्य ग्रामीणों पर हुए कथित पुलिसिया दमन का सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग छत्तीसगढ़ एवं सर्व आदिवासी समाज सरगुजा संभाग रूढ़िजन परंपरा पर आधारित ने कड़ी निंदा की है। समाज ने इसे संविधान की पाँचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 की धारा 4(आई) व 4(जे) तथा वनाधिकार मान्यता अधिनियम 2006 का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। ग्रामीणों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे विरोध प्रदर्शन का पुलिसिया दमन व ग्रामीणों के साथ मारपीट को लेकर
संगठन ने दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है,आंदोलन के अनुसार, परसोड़ी कलाँ के ग्रामीण बिना ग्रामसभा की वैध सहमति के किए जा रहे भूमि अधिग्रहण और खदान विस्तार का लगातार विरोध कर रहे थे। पेसा कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भूमि अधिग्रहण तथा खनन परियोजना के लिए ग्रामसभा की लिखित सहमति अनिवार्य है, लेकिन इसके विपरीत एसईसीएल ने एकतरफा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली। इसके बाद भारी पुलिस बल तैनात कर खनन कार्य शुरू कराने का प्रयास किया गया, जिससे ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश फैल गया और टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई, प्रांतीय अध्यक्ष युवा सुभाष परते ने ने कहा कि यह घटना राज्य सरकार की उस विफलता को दर्शाती है, जिसमें आदिवासी समुदाय मूलनिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी करते हुए कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि यह पहला मामला नहीं है—इससे पूर्व हसदेव अरण्य, रायगढ़ और परसा कोल ब्लॉक क्षेत्रों में भी फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों और भारी पुलिस बल के सहारे पेड़ों की कटाई व खनन गतिविधियाँ करवाई गई थीं।आंदोलन ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए कहा कि अमेरा खदान विस्तार परियोजना पर तुरंत रोक लगाई जाए,पेसा और वनाधिकार कानूनों का उल्लंघन कर चलाई जा रही सभी खनन परियोजनाओं को निलंबित किया जाए,ग्रामीणों पर हुए दमन के लिए दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। अगर कार्रवाई नहीं होने पर
सर्व आदिवासी समाज जल्द संभाग स्तरीय बैठक कर आगे की रणनीति तैयार कर उग्र आंदोलन की तैयारी कर पूरे आंदोलन को प्रदेश स्तरीय बनाने की रणनीति पर काम करेंगे।

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