
बिलासपुर, जंगल के रक्षक आदिवासी और उसमे भी संरक्षित आदिवासी पांच बैगा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र की मौत हो गई ,ये संरक्षित आदिवासी जीवित होते जरूर एक पेड़ अपनी मां के नाम पर लगाते, बोडला के सोनवाही में जल जनित बीमारी के कारण पांच आदिवासी असमय ही काल के गाल में समा गए,थोड़ी सी कोशिश में इनके जीवन बच सकते थे लेकिन नही हो पाया, बेचारे ये बैगा आदिवासी होते तो एक पौधा अपनी मां के नाम अभियान में शामिल होकर एक एक पौधा तो जरूर लगाते अभियान में पांच पेड़ की कमी नही आती,उनके नहि रहने पर पांच पेड़ नही लगेंगे, वैसे तो आदिवासी जंगल की रक्षा करते आ रहे शहरी लोग ही पेड़ काटते है, पांच आदिवासी की मौत मतलब जंगल के चौकीदारों को मौत उनको मौत कई नुकसान हुए एक जंगल के रक्षक चले गए दूसरे एक पेड़ मां के नाम अभियान में पांच पौधे कम लगेगें ,प्रकृति के रक्षकों को शांति मिले ।
