नालंदा परिसर बिलासपुर में बने वरना होगा आन्दोलन, कांग्रेस जिला अध्यक्ष केसरवानी की शासन को चेतवानी।

बिलासपुर किसी भी शहर की पहचान उसके विकास और विस्तार से होता है, ये दोनों निरंतर और सतत् प्रक्रिया है। नदियों के बहाव की तरह बहते रहना जरूरी है, पानी रूकेगा तो उचित नहीं होगा, ठीक वैसा ही बिलासपुर को भविष्य के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है, हम सिर्फ अतीत के भरोसे नहीं रह सकते, समय बदल रहा है, तकनीक का दौर है सुविधाओं का दौर है, इस लिहाज से बिलासपुर को भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप सुविधाएं आवश्यक है, तभी हमारी पहचान न्यायधानी और ऐतिहासिक बिलासपुर के रूप में आगे भी बने रहेगी।

मेरे इस पत्रकार वार्ता का कारण किसी की बुराई करना खामी निकालना नहीं है बल्कि बिलासपुर की दशा और दिशा कैसे बेहतर हो सके इसकी जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित करवाना व युवाओं को अपने साथ चलने के लिए प्रेरित करना है।

  1. आज नहीं छत्तीसगढ़ गठन के पहले से ही बिलासपुर अध्ययन एवं अध्यापन केन्द्र के रूप में स्थापित हो चुका है, बिलासपुर शिक्षा के हिसाब से किसी पहचान का मोहताज नहीं, इसलिए हमारा ये दायित्व बनता है कि हम शिक्षा संबंधि सुविधा व संसाधनों का लगातार विस्तार करें और नालंदा परिसर उसी का एक हिस्सा है।
  2. बिलासपुर सिर्फ एक जिला नहीं ये स्वयं संभाग होते हुए भी अन्य संभागो के लिए प्रमुख केन्द्र है अगर इसे आधा छत्तीसगढ़ कहे तो अतिश्योक्ती नहीं होगी, इस लिहाज से बिलासपुर रायपुर के बराबर सुविधाओं का हक रखता है और ये बिलासपुर का अधिकार है जो मिलना चाहिए।
  3. पहले से प्रदेश के बाहर के युवा अपने सपनों को आकार देने के लिए सिविल सर्विस की तैयारी लिए आते रहे हैं साल दर साल इनकी संख्या बढ़ती जा रही है और बिलासपुर एक एजुकेशन हब बन चुका है इसलिए शिक्षा के हिसाब से कैरियर निर्माण के लिहाज से वर्तमान समय व इसकी मांग को देखते हुए हमें सारी सुविधा व संरचना का निर्माण करना होगा, हम आग्रह करने यहां बैठे है हम लगातार आग्रह करते रहेंगे आंदोलन का भी विकल्प हमारे पास है। मगर हम महात्मागांधी के अनुयायी हैं मोहब्ब की दुकान चलाते है, हम तब तक आग्रह का दामन नहीं छोडेंगे जब तक आन्दोल Sहारी विवशता न बन जाए।

दिनांकित

  1. पी.एस.सी., यू.पी.एस.सी., नीट, जे ईई, पीएटी, सीएटी, सिविल जज, व्यापम समेत अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केन्द्र बन चुके, बिलासपुर में प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों से आए 60 हजार से भी अधिक युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

करते है। जबकि रायपुर में पहले से ही नालंदा परिसर खोलने की घोषणा की है। ऐसे में नालंदा परिसर की जरूरत बिलासपुर में रह रहे युवाओं की है।

युवा मतदाताओं की बात करें तो इनकी संख्या भी 3 लाख से ज्यादा है, इनमें 18 से 19 साल के मतदाताओं की संख्या लगभग 18 हजार से अधिक है, वही 20 से 29 साल के मतदाताओं की संख्या 2.95 लाख के आसपास है, क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से रायपुर की करे तो बिलासपुर के युवा ज्यादा है, चुनाव में नये मतदाता जोड़ने के मामले में बिलासपुर को कई बार पुरस्कृत किया जा चुका है।

  • बिलासपुर की सेंट्रल लाइब्रेरी

बिलासपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर का हब है, शहर में छोटे बड़े 77 कोचिंग संस्थान है इनमें पी.एस.सी. के 19 संस्थान, जे.ई.ई और नीट के 14, पी.ए. टी. और सी.ए.टी., सिविल जज कम्प्यूटर कोर्स सहित अन्य के 44 संस्थान है। इन कोचिंग संस्थानों के अनुसार 60 हजार से अधिक युवा शहर में रह रहे है, ऐसे में इन छात्रों की तैयारी के लिए एक सेंट्रल लाइब्रेरी है जिसकी कैपेसिटी सिर्फ 250 है। जबकि 2000 छात्र वेटिंग में है यहां 1500 छात्र प्रतिदिन तैयारी करने आते है।

  1. बिलासपुर में सिर्फ 3 संस्थान
  2. बिलासपुर एजुकेशन हब है यहां सेंट्रल यूनिवर्सिटी, अटल यूनिवर्सिटी और पं. सुंदर लाल शर्मा (ओपन) यूनिवर्सिटी है। OnePlus
  3. रायपुर में एन.आई.टी., आई.आई.एम. के साथ 6 स्टेट यूनिवर्सिटी – एम्स और हिदायतुल्ला नेशनल यूनिवर्सिटी जबकि हाई कोर्ट बिलासपुर में है।
  4. दूर्ग में आई.आई.टी. विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी सहित 4 संस्थान है।

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