पहले 74 लाख का हर महीने होता था टेंडर अब बड़ी कंपनी को फायदा पहुंचाने 4 करोड़ का टेंडर

छुट्टी के दिन टेंडर प्रक्रिया के लिए बैठक बुलाई ,ठेकेदारों में आक्रोश, उपायुक्त तथा स्वास्थ्य अधिकारी को घेरा
बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की 68 ward में में सड़कों में झाड़ू लगाने के लिए नगर निगम नगर निगम ने
1 साल के लिए 48 करोड़ का ठेका देने के लिए ई टेंडर निकाला है लेकिन निगम में अफसरो ने निगम के जनप्रतिनिधियों की सहमति लिए बगैर एवं गोपनीय तरीके से लायंस कंपनी की तर्ज पर बड़े ठेकेदारों को 48 करोड़ का टेंडर देने के लिए 6 सितंबर को निगम के स्वास्थ्य विभाग ने गुपचुप तरीके से टेंडर जारी कर दिया ,और इतनी ज्यादा कठिन शर्तें रख दी की बिलासपुर नगर निगम में पिछले 20 साल से सफाई करने वाले लोकल ठेकेदार इस टेंडर की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते। नगर निगम मेंअब सफाई ठेका में भी 48 करोड़ का टेंडर नगर निगम के द्वारा ही जारी किया गया है । जिसमें लोकलठेकेदारो को सफाई टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के लिए इतनी बड़ी शर्तें रख दी गई थी कि यहां के ठेकेदार उन शर्तों का पालन करने में असमर्थता जताई है । इस टेंडर प्रक्रिया में निगम ने शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र जो बिलासपुर नगर निगम के नए वार्ड बने हैं वहां पर सड़कों की सफाई मशीन से करने के लिए करोड़ों की पाच sweeping मशीन जरूरी होना बता दिया । साथ ही 80% मैन्युअल सफाई के लिए 100% तकनीकी एवं मशीन होने का होने का अनुभव मांगा । इसके अलावा 20 करोड़ का टर्नओवर ठेकेदारों के समक्ष शर्त रख दी है । ताकि वर्तमान में कार्यरत ठेकेदार ही इस टेंडर प्रक्रिया में भाग न ले सके । 48 करोड़ के टेंडर के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने ऐसे कठिन नियम बना दिए अब सफाई वह सड़कों में झाड़ू लगाने के लिए 20 करोड रुपए टर्नओवर के नियम बनाकर बड़ी कंपनियों को शहर में झाड़ू लगाने का ठेका देने की तैयारी नगर निगम में की जा रही है । 6 सितंबर को टेंडर निकाला गया और निगम के जनप्रतिनिधियों को भी नहीं पता चला। यहां तक की स्वास्थ्य विभाग के अफसर ने गुपचुप तरीके से यह टेंडर जारी किया और आज छुट्टी के दिन प्री बीट मीटिंग बुला लिया जिसमें लाइन कंपनी के अधिकारी ही शामिल हुए । इस गोपनीय ई टेंडर की जानकारी मिलते ही निगम में काम करने वाले 15 से अधिक ठेकेदार सहायक उपायुक्त राकेश जायसवाल तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अनुपम तिवारी के पास पहुंचे और इस टेंडर प्रक्रिया का विरोध किया तब इन दोनों अधिकारियों ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में संशोधन के लिए विचार किया जा सकता है । उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय स्तर पर निगम आयुक्त से चर्चा करने के बाद ठेकेदार की मांगों को राज्य शासन तक पहुंचाया जाएगा । लेकिन निगम के ठेकेदारों का कहना है की बड़ी कंपनी को ठेका देने के लिए बिलासपुर नगर निगम के अधिकारियों ने ही टेंडर की प्रक्रिया बनाई और यही लोकल स्तर पर टेंडर जारी कर दिया। शासन स्तर पर टेंडर प्रक्रिया को जाना ही नहीं है जबकि नगर निगम के अधिकारियों को यहीं से टेंडर जारी करना है यहीं से नियम बनाना है। 6 सितंबर को जब शहर के 68 वार्डों में झाड़ू लगाने के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किया उसके पहले बीट मीटिंग भी जनप्रतिनिधियों की नहीं ली गई । साथ ही ठेकेदारों ने टेंडर पर सवाल किया है कि जिस कंपनी का ठेका 4 सितंबर को खत्म हो चुका है इस कंपनी लायन से आज तक सफाई कर क्यों कराया जा रहा है और छुट्टी के दिन प्री बीट मीटिंग क्यों बुलाई गई थी इ। स मीटिंग की सूचना निगम के अधिकारियों ने सिर्फ इस टेंडर में भाग लेने वाली लायन कंपनी के ही अधिकारियों को दी है । जिससे लोकल ठेकेदार जो इस टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं उन्हें काफी आक्रोश है। निगम के ठेकेदारों ने कहा है कि पिछले 20 सालों से नगर निगम में यहां के लोकल ठेकेदार और स्थानीय सफाई कर्मचारियों के माध्यम से शहर में सफाई काम कर रहे हैं और उन्हें प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है । लायन कंपनी से अधिक योगय ठेकेदार बिलासपुर में नगर निगम में भी काम कर रहे हैं । लेकिन उन्हें ई टेंडर की प्रक्रिया से वंचित क्यों किया जा रहा है। ठेकेदारों ने यह भी आरोप लगाया है कि नगर निगम के 68 वार्डों में सफाई ठेका के टेंडर में ग्रामीण क्षेत्र को भी के वार्ड को भी शामिल किया गया है । जबकि ग्रामीण क्षेत्र में अभी सड़क ही नहीं है । अभी भी वहां कच्ची सड़के हैं और हाथों से ही सफाई कार्य किया जाता है । इस टेंडर प्रक्रिया में निगम के अधिकारियों ने पांच sweeping शिपिंग मशीन का अनुभव मांगा है, जबकि वर्तमान में पिछले 5 साल में एक sweeping मशीन में ही बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में सफाई कार्य किया जा रहा है फिर पांच मशीन का अनुभव क्यों मांगा जा रहा है । इसके लिए ठेकेदारों ने भी विरोध जताया है। निगम के ठेकेदार संदीप राय, सतीश सिंह, विकास, अजय ताम्रकार, पंकज तिवारी ,नीरज सिंह ठाकु,र विकास सिंह ठाकुर, नितेश त्रिपाठी ,रमेश पांडे, हरीश राठौर, विक्रांत बोले, सतीश गोयल, पिंटू पाठक ,विजय वर्मा आज निगम आयुक्त राकेश जायसवाल का घेराव किया और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी तथा लोकल ठेकेदारों को रोकने का आरोप लगाते हुए 6 सितंबर को जारी 48 करोड़ की टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। ठेकेदारों ने निगम उपायुक्त से इस पूरी टेंडर प्रक्रिया को गलत बताते हुए संशोधन करने के साथ ही ठेकेदारों ने इस टेंडर को निरस्त करने की मांग की है। निगम के ठेकेदारों ने कहा है कि पिछले 25 सालों से नगर निगम में ठेकेदारी करने वालों को टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर दिया जाए और टेंडर प्रक्रिया के नियमों में सरलीकरण किया जाए। यदि उन्हें टेंडर प्रक्रिया से वंचित किया जाएगा तो तो न्यायालय की शरण में जाएंगे । ठेकेदारों का कहना है कि नगर निगम में पूर्व में शहर में चार मुख्य मार्ग तथा 32 वार्डों में सड़कों की सफाई के लिए एवं नाली सफाई एवं कचरा उठाने के लिए एवं झाड़ू लगाने के लिए प्रति माह 70 लाख का टेंडर किया जाता था लेकिन लेकिन बड़ी कंपनी को फायदा पहुंचाने प्रति माह 4 करोड़ का सफाई टेंडर करने की तैयारी की जा रही है। ठेकेदारों का कहना है कि इस टेंडर प्रक्रिया की शासन स्तर पर जांच कराई जाए ।
