बिलासपुर- भैसाझार परियोजना का मूवायजा घोटाला सबसे पहले जाला झाड़ू न्यूज डॉट कॉम उजागर किया था ,मामला उजागर होने के बाद कमिश्नर संजय अलंग ने जांच के आदेश दिए थे जिसके बाद कलेक्टर सौरभ कुमार ने एसडीएम कोटा को सभी लोगो से वसूली का आदेश दिया एसडीएम कोटा हरिओम द्विवेदी ने काफी समय तक कलेक्टर की नोटिस पर अमल नही किया ब जाकर , तत्कालीन एसडीएम आंनद रूप तिवारी, कीर्तिमान राठौर,मोहर साय सिदार, नयाब तहसीलदार हल सिंह, राजस्व निरक्षक दिलशाद अहमद, पटवारी मुकेश साहू, जल संसाधन के तत्कालीन sdo आर एस नायडू, ee अशोक तिवारी, sdo आरपी द्विवेदी, सब इंजीनियर आरके राजपूत सभी ने ठेकेदार से दोस्ती की और 18 करोड़ों का सरकारी पैसा पवन अग्रवाल, उसकी पत्नी ,बेटे और नादित पांडे को बाट दी, दरअसल ये रकम ठेकेदार के खाते से अधिकारीयों के पास पहुंची है, भैसाझार परियोजना से कोई लाभ किसानों को भले न हुआ हो अधिकारी और ठेकेदार का भला जरूर हो गया, एसडीएम कोटा ने बिलासपुर तहसीलदार को सभी नोटिस तमिल करने के लिए भेजा है क्योंकि भैसाझार की रसमलाई खाने वाले सभी अधिकारी बिलासपुर में रहते है, भाजपा शासनकाल के इस बड़े घोटाले में सब शामिल है , मामले में रविन्द्र चौबे ने कभी भी कुछ नही कहा , क्यों कुछ नही कहा वही जाने, भाजपा शासनकाल में ठेकेदार घटिया काम करके भी बिल पास करा लिया, सरकार को तो इस मामले में वसूली के साथ एफआईआर के भी निर्देश देंना चाहिए, भैसाझार में तो रिसाव भी होने लगा है, घटिया काम को दबाने की कोशिश में विभाग लगातार काम कर रहा है ,और ठेकेदार को भुगतना भी कर रहा, यानी घोटाले का क्रम जारी है, जनहित के इस मामले में कलेक्टर सौरभ कुमार ने गड़बड़ी करने वालो के खिलाफ कार्यवाई की है

