बिलासपुर- अपोलो अस्पताल में बिना चिरफाड़ के पहली बार टॉवर।कैथेटर ऑफ वाल्व पद्धति से 65 साल की वृद्ध का सफल ऑपरेशन किया है ,अभी तक इस तरह के इलाज के लिये लोगो बाहर जाते थे लेकिन अब इस इलाज की सुविधा बिलासपुर अपोलो में उपलब्ध है हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर राजीव लोचन भांजा ने बताया मरीज के मेन नली में कैल्शियम जमा हो गया था जो एक एज के बाद होता है, इस पद्धति से वाल्व बदले जाने का सक्सेस रेट सौ परसेंट है, इसमे मरीज को खतरा है, जल्दी अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, मेट्रिक यूएसए का इस्तेमाल बिलासपुर अपोलो अस्पताल में पहली बार किया गया और डॉक्टरों ने सफलता पाई है, डेढ़ घंटे के इस ऑपरेशन के बाद मरीज को एक दिन में छुट्टी दे दी गई, पहले ऑपरेशन बाहर होते थे,इसमी खर्च ज्यादा आता था, अब बिलासपुर में ये सुविधा उपलब्ध है, इसका खर्च 26 लाख का है, एनेस्थीसिया के डॉक्टर विनीत श्रीवास्तव ने बताया कि जब मरीज को बहुत सारी बीमारी हो तो ऐसे मरीजों को ऑपरेशन के समय एनेस्थीसिया देना कठिन का होता ,लेकिन फिर भी उनको बेहतर मैनेजमेंट से एनेस्थीसिया दिया गया ताकि मरीज ऑपरेशन के समय शांत रहे। अपोलो के सीईओ मनोज नागपाल ने बताया कि इसमे डॉक्टरों ने बेहतर काम किया है, वाल्व बदलने का ये प्रयास अपोलो ने कर दिखाया लोग इस इलाज के लिए बाहर जाते है अब बिलासपुर अपोलो में ये इलाज शुरू हो गया सबसे अच्छी बात इस ट्रीटमैंट की ये है कि मरीज को कम खतरा है ,जबकि ओपेन हार्ट में मरीज को ज्यादा खतरा रहता है उसमे मरीज दो दिन में डिस्चार्ज हों जाता है,डॉक्टर भांजा ने बताया कि अभी प्रदेश में केवल 2 ,3 जगह ही इस तरह का ऑपरेशन हुआ है और अपोलो का सक्सेस रेट अच्छा है। ऑपरेशन में डॉक्टर वैभव ओतलवार भी शामिल थे।

