हाईकोर्ट की अवमानना मामले में आई.ए.एस. मनोज पिंगवा को लगातार पांचवी अवमानना नोटिस

बिलासपुर- न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 12 में दण्ड का प्रावधान ) राजनांदगांव निवासी दुलेलराम कुंजाम का राजनांदगांव से डोंगरगढ़ स्थानांतरण किये जाने पर दुलेलराम कुंजाम द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई थी उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायाधीश पार्थप्रतीम साहू द्वारा मामले की सुनवाई के पश्चात इस आधार पर की याचिकाकर्ता शारीरिक रूप से दिव्यांग है एवं उसकी उम्र 55 वर्ष है इस आधार पर स्थानांतरण समिती को नियमानुसार मामले के निराकरण का निर्देश दिया गया । हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा पारित आदेश का पालन ना किये जाने पर दुलेलराम कुंजाम द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय , घनश्याम शर्मा एवं दुर्गा मेहर के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष अवमानना याचिका दायर की गई अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय , घनश्याम शर्मा एवं दुर्गा मेहर द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गठित स्थानांतरण समिती के अध्यक्ष आई.ए.एस. मनोज पिंगवा द्वारा किसी भी मामले में हाईकोर्ट बिलासपुर के आदेश का पालन ना कर हाईकोर्ट की घोर अवमानना की जा रही है । लगातार एक माह के भीतर डॉ . वंदना मेले विरुद्ध मनोज पिंगवा के मामले में डिवीजन बेंच द्वारा डॉ . राकेश प्रेमी विरुद्ध मनोज पिंगवा कुंजेश्वर कौशल विरुद्ध मनोज पिंगवा योगेन्द्र कौशल विरुद्ध मनोज पिंगवा , दुलेलराम कुंजाम विरुद्ध मनोज पिंगवा के मामले में सिंगल बेंच द्वारा इस प्रकार एक माह के भीतर लगातार पांच मामलों में आई.ए.एस. मनोज पिंगवा के विरुद्ध हाईकोर्ट की अवमानना मामले में नोटिस जारी की गई है , परन्तु आई.ए.एस. मनोज पिंगवा द्वारा किसी भी मामले में निर्धारित समयसीमा के भीतर हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है । अधिवक्तागण द्वारा हाईकोर्ट के समझ यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया कि न्यायालय अवमान अधिनियम 1971 की धारा -12 में जुर्माना एवं कठोर दण्डादेश का प्रावधान किया गया है । हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा अवमानना मामलों में कठोर कार्यवाही ना किये जाने से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष अवमानना मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है एवं न्यायालय का कीमती समय अवमानना मामलों की सुनवाई में व्यर्थ होने के कारण सैकड़ों अन्य पीड़ित पक्षकारों के मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही हैं । अधिवक्तागण द्वारा यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया कि एक रिट मामले की सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा सचिव , छत्तीसगढ़ शासन रायपुर द्वारा एक मामले में निर्धारित समयसीमा के भीतर हाईकोर्ट के आदेश का पालन ना किये जाने एवं समय पर जवाब प्रस्तुत ना किये जाने पर सिंगल जज राकेश मोहन पाण्डेय द्वारा स्कूल शिक्षा सचिव के विरूद्ध 20,000 रूपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया ।समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि आई.ए.एस. मनोज पिंगवा द्वारा मार्च माह के भीतर लगातार पांचवी बार हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना किये जाने पर उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ कर गंभीर दण्डादेश पारित किया जाए । उच्च न्यायालय बिलासपुर के सिंगल जज श्री पार्थ प्रतीम साहू द्वारा उक्त अवमानना याचिका की सुनवाई के पश्चात् आई.ए.एस. मनोज पिंगवा के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी कर तत्काल जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है ।

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