बिलासपुर-आर एस एस प्रमुख का एक ऊलजलूल बयान आया कि पंडितों ने ऊंच नीच बढ़ाया, इससे साफ हैक की ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति पास जरूरी नही की बुद्धि और समझ हो ,महंगाई ,रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों को छोड़ कर ऊलजलूल बात कर रहे है , अपना काम करने वाले को उसकी जाति बता दी गई ,आज कोई भी वर्ग किसी भी वर्ग का काम कर रहा है तो फिर आज के हिसाब से जाति गणना होनी चाहिए , अपने एक्सपेरिमेंट के लिए समाज मे जहर नही बोना चाहिए, कोई गलत शलत व्यख्या करके छोड़ दे तो बिना सोचे समझे बयानबाजी ठीक नही है।स्वार्थ की राजनीति में मानवता को आग में झोंकना गलत है, किसी बुराई करने के लिए कोई संस्था नही बनती ,अगर लोग आपकी संस्था पर विश्वास करते है है तो इसका ये मतलब नही की आप किसी भावना को ठेस पहुंचाए, आज जातिवाद खत्म करने का वक्त है आर्थिक रूप से पिछड़े हर व्यक्ति को आरक्षण की जरूरत है लेकिन इसे जाति से न जोड़े , हर समाज मे गरीब लोग है और हर समाज मे पैसे वाले भी है वस्तु स्थिति जाने बिना किसी भी बात पर बोलना आत्मघाती और सर्वघाती हो सकता है,आप कुछ अच्छा समय रहते स्वार्थवस नही कर पाए ये आपकी कमजोरी है ,अनर्गल बयानबाज़ी करके किसी अपशब्द कहने का अधिकार अपने पास नही है, पंडित सबके पास जाता सबके लिए करता है समाज को जोड़ने का काम करता , जमीन सच्चाई यही है, एसपीजी सुरक्षा में बैठकर कुछ भी बोलने से बचना चाहिए।

