प्रदेश प्रभारी ओम माथुर हर जिले की समीक्षा के देंगे टिकट, लेकिन संहि आंकलन चुनौती, कॉकस के जाल में फसे तो फेल हो जाएंगे।

बिलासपुर- प्रदेश प्रभारी ओम माथुर हर जिले की समीक्षा बैठक करेंगे कार्यकर्ताओं से मिलेंगे ,उसके बाद टिकट देंगे माथुर अभी आत्मविश्वास से भरे है 9 राज्यों के प्रभारी होने का अनुभव है , लेकिन ये छत्तीसगढ़ है यंहा के नेताओं को पार पाना मुश्किल है ,कौन किसके लिए कब कौन सा गणित फिट कर देगा इसका अंदाज शायद हो माथुर को नही होगा,यंहा के पुराने नेता शायद अपने जाल में प्रदेश प्रभारी को फसाने में सफल हो जाये , हालांकि माथुर की शैली से लगता नही की वो इन नेताओं के जाल में फसेंगे, बतौर किसी कंपनी की फ्रेंचाइजी की तरह छत्तीसगढ़ में चल रही बीजेपी में जमीन और पार्टी के प्रति डीओटी कार्यकर्ता आज भी अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहा है, निचे स्तर पर संगठन हर जिले में वंहा के पुराने मठाधीश नेताओ की जागीर है ,पार्टी कार्यकर्ता अगर उनको पसंद नही तो उसको जिले के कार्यक्रम की सुकना भी नही दी जाती ,फिर यही नेता ऐसे समर्पित कार्यकर्ता को निष्क्रिय बताने में सफल हो जाते है , पुराने नेता धौंस की राजनीति से पार्टी को चला रहे है , आज जबकि बीजेपी एक ब्रांड बन गई है व्यक्ति से नही बीजेपी के नाम से मतदाता वोट करता है , मोदी का फैक्टर भी काम कर रहा है , यंहा के नेता पार्टी से ऊपर ,अच्छा काम करने की समझ कम है जिससे जनता खुश हो ,कार्यकर्ता खुश हो , सालों पार्टी अगर सत्ता से बाहर हुई है तो इसके लिए रमन सिंह जिम्मेदार है जिन्होंने ने 15 साल उन्ही उन्ही नेताओं को मंत्री बनाया विधायक बनाया ,कार्यकर्ताओं को पूछा नही रमन सिंह ने मैनेजमेंट से चुनाव जीता जनता का उनके प्रति कोई मोह नही है ,न कार्यकर्ता का ,रमन ने पार्टी को मजबूत नही किया केवल अपने और अपने लोग को मजबूत किया, भ्रष्टाचार की राह के कारण एक नीले रंग यामाहा में चलने वाला मंत्री आज हजारो करोड़ का मालिक बन गया , ऐसे कई मंत्री नेता और अधिकारी है , पार्टी आज गर्त में है तो इसके लिए रमन सिंह ही जिम्मेदार है , चाहते तो हर कार्यकर्ता को मजबूत कर सकते थे लेकिन रमन सिंह में हर जिले के नेता मंत्री को फ्रेंचाइजी दे रखी थी ,कभी किसी कार्यकर्ता की नही सुनी, अगर जिल्रे का नेता समर्पित कार्यकर्ता से नाराज है तो रमन सिंह भी ऐसे कार्यकर्ता की बात नही सुनते थे, जिसकी वजह से हर जिले में कार्यकर्ता नाराज होते चला गया और लोग नाराज़ होते गए और सत्ता से बाहर कर दिया। बीजेपी अगर सत्ता में आना चाहती है तो फ्रेंचाइजी वादा को खत्म करना होगा, कई मंत्री नेता ढंग से बात नही ,करते फिर माथुर की इस बात पर भरोसा कैसे होगा होगा कि हम रूलिंग पार्टी के सदस्य है लोगो को विश्वास दिलाओ की उनका काम होगा। टिकट बाटने में ध्यान रखा जाए कि पैराशूट नेता को टिकट न मिले इससे हर विधासभा मजबूत होगा, चुनाव जीतना है बीजेपी को तो पुराने नेताओं पर खास नजर रखनी होगी ,इनका व्यवहार सुधारना होगा ,अरुण साव अभी पुराने नेताओं के गणित से ही परेशान है ,टिकट देने से पहले ब्रम्हानंद भी खोजना होगा ,बिलासपुर जिले के एक नेता के ऊपर भी इस तरह के आरोप है ,इसलिए सावधानी ही ओम माथुर को अपना रिकॉर्ड बरकरार रखने में मदद कर सकती है।

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