बिलासपुर-75 वर्षीय वृद्ध माता की बीमारी के आधार पर ट्रांसफर कमेटी मामले का निराकरण करें । 5 भक्त कंवरराम गेट , ट्राईबल कालोनी , बिलासपुर निवासी अल्पना तिवारी प्री मैट्रिक बैगा कन्या छात्रावास बिलासपुर में छात्रावास अधीक्षिका के पद पर पदस्थ थीं । उक्त पदस्थापना के दौरान सचिव आदिम जाति विकास विभाग द्वारा अल्पना तिवारी का स्थानांतरण जिला बिलासपुर से जिला – गौरेला पेण्ड्रा मरवाही कर दिया गया । उक्त स्थानांतरण आदेश से क्षुब्ध होकर अल्पना तिवारी द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई । अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अल्पना तिवारी की माता 75 वर्ष की वृद्ध महिला हैं एवं उनका 80-90 प्रतिशत हार्ट ब्लॉकेज है वे चलने फिरने में भी असमर्थ हैं , अपने जीवन यापन के लिए पूर्ण रूप से याचिकाकर्ता पर आश्रित हैं एवं लगातार 02 ( दो ) वर्ष से उनका एम्स हॉस्पिटल रायपुर में ईलाज चल रहा है , चुंकि गौरेला पेण्ड्रा मरवाही से एम्स रायपुर की दूरी बहुत अलग है एवं माताजी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अन्यत्र किसी स्थान पर शिफ्ट करने में जान का खतरा है । याचिकाकर्ता के अधिवक्तागण द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में एस . के . नौशाद रहमान एवं अन्य विरुद्ध यूनियन ऑफ इण्डिया एवं अन्य के बाद में पारित न्याय दृष्टांत का हवाला दिया गया इस दृष्टांत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है कि गंभीर बीमारी के मामलों में किसी शासकीय अधिकारी / कर्मचारी का स्थानांतरण प्रतिबंधित है । उच्च न्यायालय , बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् रिट याचिका को स्वीकार कर स्थानांतरण समिती को यह निर्देश दिया गया कि वे याचिकाकर्ता की 75 वर्षीय वृद्ध माता की गंभीर बीमारी को देखते हुए याचिकाकर्ता के स्थानांतरण मामले का निराकरण करें।

